Supreme Court Aravalli verdict
नई दिल्ली,एजेंसियां। अरावली पहाड़ियों को लेकर केंद्र सरकार की परिभाषा को सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वीकार किए जाने के बाद केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने संरक्षण को लेकर सरकार का पक्ष स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि अरावली पहाड़ियों का लगभग 90 प्रतिशत क्षेत्र पूरी तरह सुरक्षित है और अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए सख्त कदम उठाए गए हैं।
अवैध खनन रोकने के लिए सख्त परिभाषा
एएनआई को दिए इंटरव्यू में भूपेंद्र यादव ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने यह परिभाषा खास तौर पर अवैध खनन को नियंत्रित करने के उद्देश्य से स्वीकार की है। उन्होंने कहा कि अरावली रेंज में केवल 0.19 प्रतिशत क्षेत्र में ही खनन की अनुमति है, जो एक प्रतिशत से भी कम है। इसके अलावा, इस सीमित क्षेत्र में भी किसी नई खदान को मंजूरी नहीं दी गई है।
वैज्ञानिक प्रबंधन योजना अनिवार्य
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अरावली क्षेत्रों में किसी भी तरह की खनन गतिविधि के लिए वैज्ञानिक प्रबंधन योजना जरूरी है। यदि भविष्य में कोई नया प्रस्ताव आता है तो उसे इंडियन काउंसिल ऑफ फॉरेस्ट्री रिसर्च एंड एजुकेशन (ICFRE) से मंजूरी लेनी होगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित न हो।
पूरी इकोलॉजी पर जोर
भूपेंद्र यादव ने स्पष्ट किया कि अरावली को बचाने के लिए केवल पेड़ लगाना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि यह एक संपूर्ण पारिस्थितिकीय तंत्र है, जिसमें घास, झाड़ियां, औषधीय पौधे और वन्यजीव शामिल हैं। इसी सोच के तहत सरकार ने अरावली रेंज में 29 नर्सरी विकसित की हैं और इन्हें हर जिले में बढ़ाने की योजना बनाई गई है।
बिग कैट अलायंस और जैव विविधता
मंत्री ने इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस का जिक्र करते हुए कहा कि किसी भी बड़े शिकारी जीव के संरक्षण के लिए उसका पूरा इकोसिस्टम सुरक्षित होना जरूरी है। हिरण जैसे शिकार और उनके लिए घास व वनस्पति का होना भी उतना ही अहम है।
सरकार का दावा: अरावली सुरक्षित
भूपेंद्र यादव ने भरोसा दिलाया कि लगातार वृक्षारोपण, इको-सेंसिटिव जोन की अधिसूचना और खनन व शहरी गतिविधियों की कड़ी निगरानी से अरावली पहाड़ियां देश की प्राकृतिक धरोहर और इकोलॉजिकल शील्ड के रूप में सुरक्षित रहेंगी।

