Amit Shah:
रायपुर, एजेंसियां। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह दो दिन के छत्तीसगढ़ दौरे पर हैं। उनका यह दौरा सुरक्षा, राजनीति, और संगठन तीनों स्तरों पर गहरा असर डालने वाला माना जा रहा है। अमित शाह विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा उत्सव में शामिल होंगे और पारंपरिक आयोजन ‘मुरिया दरबार’ में भाग लेंगे।
बस्तर दौरे का मकसद
अमित शाह का यह दौरा नक्सल प्रभावित इलाकों में चल रहे अभियानों की समीक्षा के लिए है। शाह बस्तर के प्रशासनिक अधिकारियों और सुरक्षा एजेंसियों से बैठक करेंगे। लक्ष्य है कि मार्च 2026 तक बस्तर को नक्सल मुक्त बनाया जाए। केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर इस मिशन को पूरा करने में जुटी हैं।
राजनीतिक मायने
यह दौरा सिर्फ सुरक्षा समीक्षा तक सीमित नहीं है इसके राजनीतिक संकेत भी गहरे हैं। आगामी छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों से पहले बीजेपी बस्तर में अपना संगठन मजबूत करना चाहती है। शाह का यह दौरा कार्यकर्ताओं में जोश भरने और आदिवासी वोट बैंक को साधने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
दशहरा से जुड़ा संदेश
अमित शाह का बस्तर दशहरा में शामिल होना, आदिवासी परंपराओं के सम्मान और स्थानीय समुदाय से जुड़ाव का प्रतीक है। इससे बीजेपी यह संदेश देना चाहती है कि वह बस्तर और इसके मूल निवासियों की संस्कृति और पहचान का सम्मान करती है।
नक्सलवाद पर सख्त रुख
अमित शाह लगातार यह दोहराते रहे हैं कि सरकार का लक्ष्य है “मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त करना।” 2023 से अब तक सुरक्षा बलों ने 450 से अधिक नक्सलियों को मार गिराया, जिनमें अधिकतर बस्तर क्षेत्र में सक्रिय थे। सितंबर में ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट की सफलता के बाद शाह ने CRPF, DRG, COBRA और छत्तीसगढ़ पुलिस के जवानों को सम्मानित किया था।
उन्होंने कहा था कि यह अभियान “भारत के नक्सल विरोधी इतिहास में स्वर्णिम अध्याय” बन जाएगा। अमित शाह ने स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार तब तक चैन से नहीं बैठेगी, “जब तक हर नक्सली या तो आत्मसमर्पण नहीं कर देता, या पकड़ा या समाप्त नहीं कर दिया जाता।” उन्होंने यह भी दोहराया कि पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत को 2026 तक नक्सल मुक्त बनाया जाएगा।
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