Aizawl Rail service:
आइजोल, एजेंसियां। मिजोरम की राजधानी आइजोल अब भारतीय रेल नेटवर्क का हिस्सा बन गई है। बैरवी-साइरंग रेल परियोजना के पूरा होने के साथ आइजोल देश के बाकी हिस्सों से सीधे रेल द्वारा जुड़ गया है। यह परियोजना न केवल पूर्वोत्तर के विकास और व्यापार को बढ़ावा देगी, बल्कि लोगों के यात्रा समय और खर्च में भी भारी कमी लाएगी। साथ ही, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी महत्वपूर्ण सुविधाओं तक पहुंच भी आसान होगी।
79 साल बाद मिली रेल सेवा
“हेवेन ऑफ नॉर्थईस्ट” के नाम से मशहूर मिजोरम अब तक रेल सुविधा से वंचित था और बड़ी आबादी ने कभी ट्रेन तक नहीं देखी थी। स्वतंत्रता के 79 साल बाद पहली बार आइजोल में ट्रेन पहुंची है, जिससे मिजोरम भी भारतीय रेल के मुख्य नक्शे पर शामिल हो गया है। नार्थ ईस्ट रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी के. के. शर्मा ने बताया कि इस नई रेल लाइन के शुरू होने के साथ असम, अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा और मिजोरम की राजधानी देश के बाकी हिस्सों से जुड़ जाएगी।रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे मिजोरम को भारत के दिलों से जोड़ने वाली परियोजना करार दिया है और कहा कि आने वाले महीनों में इसे शुरू किया जाएगा।
आइजोल से अब 3 घंटे में पहुंचा जा सकेगा सिलचर
मौजूदा समय में आइजोल पहुंचने के लिए केवल हवाई या सड़क मार्ग के विकल्प थे। सड़क मार्ग से सिलचर से आइजोल तक 8 से 10 घंटे लगते थे, जबकि अब रेल के जरिए यह दूरी मात्र 3 घंटे में पूरी की जा सकेगी। इससे लोगों की यात्रा काफी आसान और सस्ती हो जाएगी।
नार्थ ईस्ट रेलवे ने बताया कि असम के बदरपुर से लेकर भौरावी तक ट्रेन सेवा शुरू है और भौरावी से कुर्तिकी, कानपुई, मुलखांग और सायरंग स्टेशन प्रमुख हैं। मिजोरम में कुल 51 किलोमीटर की रेल लाइन बनी है। इस रेल प्रोजेक्ट से ट्रेनें करीब 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकेंगी।
2008 में शुरू हुआ सपना, 2014 में मिली रफ्तार
आइजोल तक रेल सेवा लाने का सपना साल 2008 में देखा गया था, लेकिन काम को गति साल 2014 में मिली जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 नवंबर 2014 को बैरवी-साइरंग रेल परियोजना की आधारशिला रखी। लगभग 5022 करोड़ रुपये की लागत से बना यह प्रोजेक्ट मिजोरम के लिए जीवनरेखा साबित होगा।
कुतुबमीनार से ऊंचा पुल और 100 साल की मजबूती
इस पहाड़ी इलाके में 154 पुल और 48 टनल बनाए गए हैं। सबसे ऊंचा रेल पुल 104 मीटर ऊंचा है, जो कुतुबमीनार से 42 मीटर ज्यादा ऊंचा है। इस परियोजना को आईआईटी कानपुर और आईआईटी गुवाहाटी की मदद से डिजाइन किया गया है और यह भूकंपीय जोन 5 में भी लगभग 100 साल तक टिकाऊ रहेगा।
दिल्ली से आइजोल होगी डायरेक्ट कनेक्टिविटी
इस नई लाइन के बाद दिल्ली से आइजोल की सीधी रेल सेवा संभव होगी। परियोजना के मुख्य इंजीनियर विनोद कुमार के मुताबिक, इससे मिजोरम के लाखों लोग रेल नेटवर्क से जुड़ेंगे और देश के किसी भी हिस्से तक पहुंच आसान होगी। माल परिवहन सस्ता और तेज होगा, जिससे मिजोरम के आर्थिक और सामाजिक विकास को भी बल मिलेगा।
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