LAC dispute: मोदी- जिनपिंग की मुलाकात के बाद LAC विवाद पर सुलझेंगे रिश्ते, तीन चरणों में होगा समाधान

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नई दिल्ली, एजेंसियां। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हाल ही में हुई मुलाकात ने सीमा विवाद के समाधान के लिए नए रास्ते खोल दिए हैं। तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान एक घंटे लंबी द्विपक्षीय वार्ता में दोनों नेताओं ने सीमा विवाद को सुलझाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई। इस मुलाकात ने उम्मीद जताई है कि कोर कमांडर स्तर की बातचीत को नई रफ्तार मिलेगी और सीमा पर लम्बित मुद्दों को हल करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।

तीन चरणों में समाधान प्रक्रिया

  • डिसएंगेजमेंट (सैन्य टकराव से पीछे हटना):
    पहला चरण अधिकांश रूप से पूरा हो चुका है, जिसमें सेनाएं कुछ क्षेत्रों से पीछे हटीं। हालांकि, पेट्रोलिंग अब भी कई इलाकों में बहाल नहीं हो पाई है।
  • डी-एस्केलेशन (सैन्य जमावड़े को कम करना):
    दूसरे चरण में, सीमा पर भारी सैन्य ताकतों को कम करके उन्हें डेप्थ एरिया तक भेजने का कार्य जारी रहेगा।
  • डी-इंडक्शन (सैन्य टुकड़ियों का मूल स्थान पर लौटना):
    तीसरे चरण में, 2020 के तनाव के बाद अलग-अलग स्थानों पर भेजी गई सैन्य टुकड़ियों को उनके मूल यूनिट में वापस भेजने का कार्य होगा।

सीमा विवाद के समाधान के लिए वार्ता तंत्र:

  • WMCC (वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड कोऑर्डिनेशन):
    यह तंत्र सीमा विवाद के अलावा अन्य मुद्दों पर भी बातचीत करता है।
  • स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव डायलॉग:
    भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच वार्ता होती है।
  • कोर कमांडर और लोकल कमांडर स्तर की वार्ता:
    यह सैन्य स्तर पर विवाद सुलझाने का एक महत्वपूर्ण जरिया है, जिसमें दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और सैन्य संवाद बढ़ा है।

बातचीत में प्रगति:

अब तक हुई कोर कमांडर स्तर की वार्ताओं ने जमीन पर सुरक्षा स्थिति में सुधार लाया है। 22 दौर की वार्ता के बाद, कई क्षेत्रों में सेनाएं वापस हो गईं और पेट्रोलिंग का काम शुरू हो गया। अब तियानजिन में हुई बैठक से उम्मीद है कि इस प्रक्रिया को तेज़ी मिलेगी और लंबित मुद्दों पर समाधान होगा।

विशेष प्रतिनिधि वार्ता

हाल की विशेष प्रतिनिधि वार्ता में यह सहमति बनी कि अब सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश समेत अन्य क्षेत्रों में भी जनरल लेवल मैकेनिज्म लागू होगा। इसका मतलब यह है कि अगर स्थानीय स्तर पर विवाद हल नहीं होता तो सीधे कोर कमांडर स्तर पर बातचीत की जाएगी। इससे LAC पर विवादों के समाधान के लिए एक समान तंत्र तैयार होगा।

भारत-चीन रिश्तों की अग्निपरीक्षा

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात ने संकेत दिया है कि दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को लेकर गंभीरता से समाधान निकाला जाएगा। तियानजिन में हुई बैठक से यह स्पष्ट है कि दोनों देश अपनी सैन्य रणनीतियों को दोबारा से संरेखित करना चाहते हैं। अब देखना यह होगा कि डी-एस्केलेशन और डी-इंडक्शन की प्रक्रिया कितनी जल्दी पूरी होती है और क्या दोनों देशों के बीच 2020 से पहले जैसी शांति स्थापित हो पाती है।

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