Maratha reservation: मराठा आरक्षण आंदोलन के बाद आजाद मैदान में कचरे का अंबार, बीएमसी ने चलाया रातभर सफाई अभियान

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Maratha reservation:

मुंबई,एजेंसियां। मराठा आरक्षण आंदोलन के बाद मुंबई के आजाद मैदान और आसपास के क्षेत्र में भारी गंदगी का साम्राज्य फैल गया। मराठा आंदोलन के प्रमुख कार्यकर्ता मनोज जरांगे द्वारा अनशन समाप्त करने के बाद, मैदान कचरे और पानी की बोतलों से अटा पड़ा था। इसके बाद बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के कर्मचारियों ने रातभर सफाई अभियान चलाकर क्षेत्र को फिर से साफ किया।

प्रदर्शन खत्म, कचरे का अंबार

पांच दिनों तक चले इस आंदोलन में हजारों प्रदर्शनकारी मुंबई पहुंचे थे। आंदोलन खत्म होने के बाद कार्यकर्ता अपने-अपने घरों को लौट गए, लेकिन आजाद मैदान और आसपास की सड़कों पर पानी की बोतलें, खाने के पैकेट, प्लास्टिक कप और रैपर बिखरे पड़े थे। खासकर आजाद मैदान के बाहर पानी की बोतलों के ढेर ने सबसे ज्यादा ध्यान आकर्षित किया।कुछ मराठा कार्यकर्ताओं ने कोशिश की कि बचे हुए खाने को बर्बाद न होने दिया जाए और उसे स्थानीय लोगों और राहगीरों में बांट दिया। इसके साथ ही, कुछ कार्यकर्ताओं का कहना था कि बची हुई बोतलें और अन्य सामग्री मुंबई के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बांटने की योजना थी। बावजूद इसके, मैदान में काफी मात्रा में कचरा बचा रह गया था।

बीएमसी का सफाई अभियान

कचरे का ढेर देखकर बीएमसी ने इसे साफ करने की जिम्मेदारी ली। बीएमसी कर्मचारियों ने रातभर सफाई अभियान चलाकर आजाद मैदान और आसपास के इलाकों को साफ किया। नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के बड़े आयोजनों के बाद सफाई एक बड़ी चुनौती बन जाती है, लेकिन उनकी टीम ने इसे पूरी तरह से साफ करने की पूरी कोशिश की ताकि शहर की रोज़मर्रा की रफ्तार में कोई रुकावट न आए।

सीएसएमटी इलाके में राहत

सोमवार की तुलना में मंगलवार को छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) के बाहर का क्षेत्र और आसपास की सड़कें अपेक्षाकृत साफ नजर आईं। हालांकि, आजाद मैदान और उसके पास के हिस्सों में अभी भी गंदगी के ढेर दिखाई दे रहे थे।

क्यों नहीं कर पाए प्रदर्शनकारी सफाई?

एक मराठा समुदाय के कार्यकर्ता ने बताया कि वे खुद सफाई करना चाहते थे, लेकिन आंदोलन के अधिकांश कार्यकर्ता वापस अपने गांव लौट चुके थे। वहीं, स्थानीय लोग गणपति विसर्जन की तैयारियों में व्यस्त थे, इस कारण सफाई का काम पूरी तरह बीएमसी को सौंपना पड़ा।इस प्रकार, बीएमसी ने अपनी पूरी टीम के साथ मिलकर पूरे क्षेत्र को साफ किया और आंदोलन के बाद फैलने वाली गंदगी से निपटने में सफलता पाई।

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