Naxal commander Rupesh:
रायपुर, एजेंसियां। छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ बड़ी हासिल हुई है। बस्तर के दंडकारण्य इलाके में 208 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, जिसमें कई कुख्यात और बड़े कमांडर शामिल हैं। इनमें 110 महिलाएं और 98 पुरुष शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, इनमें वह व्यक्ति भी है जिसे नक्सल संगठन का ‘बॉम्बमेकर’ कहा जाता है, जिसका नाम तक्कल्लापल्ली वासुदेव राव उर्फ रूपेश है। सभी नक्सली मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सामने औपचारिक रूप से आत्मसमर्पण किया।
कौन है ‘बॉम्बमेकर’ रूपेश?
तक्कल्लापल्ली वासुदेव राव उर्फ रूपेश, 59 वर्षीय माओवादी कमांडर और संगठन का प्रमुख ‘बॉम्बमेकर’ रहा है। तेलंगाना के मुगुलू का रहने वाला रूपेश लंबे समय से छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ क्षेत्र में सक्रिय था। वह माओवादी संगठन के लिए विस्फोटक और हाई-प्रोफाइल ऑपरेशनों का मास्टरमाइंड माना जाता था। उस पर 2 दिसंबर 2000 को आंध्र प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू पर हुए हमले और 1999 में गृह मंत्री ए. माधव रेड्डी तथा युवा IPS अधिकारी उमेश चंद्र की हत्याओं में शामिल होने का आरोप है।
नक्सलियों ने कितने हथियार सौंपे ?
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को सरकार की पुनर्वास योजना का लाभ मिलेगा। सरेंडर के दौरान नक्सलियों ने 153 हथियार भी अधिकारियों को सौंपे, जिनमें 19 AK-47, 17 SLR, 23 इंसास राइफल, 1 इंसास LMG, 36.303 राइफल, 4 कार्बाइन, 11 BGL लॉन्चर, 41 बारह बोर और 1 पिस्तौल शामिल हैं।
उत्तर बस्तर क्षेत्र हुआ नक्सल मुक्त ?
अधिकारियों का कहना है कि इस बड़े आत्मसमर्पण के बाद उत्तर बस्तर क्षेत्र लगभग नक्सल मुक्त हो चुका है। अब सुरक्षाबलों का ध्यान दक्षिण बस्तर पर केंद्रित किया जाएगा ताकि पूरे राज्य को लाल आतंक से पूरी तरह आज़ाद कराया जा सके।
मुख्यमंत्री ने सभी नक्सली का स्वागत किया
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे ऐतिहासिक दिन बताते हुए कहा, “आज न सिर्फ छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का दिन है। बड़ी संख्या में नक्सली अब संविधान और लोकतंत्र में विश्वास जताते हुए विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं। उनका स्वागत है।”
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