Supreme Court order:
नई दिल्ली, एजेंसियां। सुप्रीम कोर्ट ने 17 राज्यों और 7 केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे चार महीने के भीतर आनंद कारज एक्ट, 1909 (2012 में संशोधित) के तहत सिख विवाहों के पंजीकरण के लिए नियम अधिसूचित करें। अदालत ने कहा कि धार्मिक पहचान का सम्मान और नागरिक समानता सुनिश्चित करने के लिए कानून को एक तटस्थ और व्यावहारिक मार्ग प्रदान करना आवश्यक है।
Supreme Court order: कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया
कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि जब कानून आनंद कारज को वैध विवाह का प्रकार मानता है, लेकिन इसे पंजीकृत करने का तंत्र नहीं प्रदान करता, तो यह वादा अधूरा माना जाएगा। जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि राज्य को किसी नागरिक की आस्था को बाधा या विशेषाधिकार में बदलने का अधिकार नहीं है।
Supreme Court order: अधिनियम में धारा 6 के तहत
अधिनियम में धारा 6 के तहत राज्यों को नियम बनाने, विवाह रजिस्टर रखने और प्रमाणित उद्धरण जारी करने का दायित्व सौंपा गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पंजीकरण की सुविधा में असमानता समान नागरिकों के लिए असमान परिणाम पैदा करती है। आदेश के अनुसार, जहां सामान्य सिविल विवाह पंजीकरण प्रणाली मौजूद है, वहां आनंद कारज से संपन्न विवाहों को भी समान ढांचे में दर्ज किया जाना चाहिए।
Supreme Court order: अदालत ने कहा
अदालत ने कहा कि जिन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने अभी तक नियम अधिसूचित नहीं किए हैं, उन्हें चार महीने के भीतर ऐसा करना होगा और तब तक सभी आनंद कारज विवाहों को बिना किसी भेदभाव के पंजीकृत करने की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।
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