SpiceJet plea dismissed
नई दिल्ली, एजेंसियां। देश की शीर्ष अदालत सुप्रीम कोर्ट ने एयरलाइन कंपनी स्पाइसजेट और उसके चेयरमैन अजय सिंह की याचिका खारिज कर दी है। यह याचिका दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने के लिए दायर की गई थी, जिसमें स्पाइसजेट को 144.51 करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश दिया गया था।
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने 19 जनवरी के हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के 2023 के निर्देशों का पूर्ण पालन नहीं किया गया है। इसके साथ ही अदालत ने अजय सिंह पर ‘अनावश्यक रूप से मुकदमेबाजी जारी रखने’ के लिए एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद वर्ष 2015 के शेयर ट्रांसफर समझौते से जुड़ा है। उस समय उद्योगपति कलानिधि मारन और उनकी कंपनी केएएल एयरवेज प्राइवेट लिमिटेड ने स्पाइसजेट में अपनी 58.46 प्रतिशत हिस्सेदारी अजय सिंह को बेच दी थी। इस सौदे के बाद भुगतान को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद उत्पन्न हुआ, जो मध्यस्थता और फिर अदालत तक पहुंचा।स्पाइसजेट ने अदालत में स्वीकार किया था कि कुल 194.51 करोड़ रुपये देय हैं। कंपनी ने बताया कि इसमें से 50 करोड़ रुपये पहले ही जमा किए जा चुके हैं, जबकि 144.51 करोड़ रुपये अभी शेष हैं।
कंपनी का पक्ष और आगे की स्थिति
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद स्पाइसजेट ने बयान जारी कर कहा कि वह अदालत के आदेश को ध्यान में रखते हुए सभी निर्देशों का पालन करेगी। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि इस कानूनी घटनाक्रम का उसके दैनिक परिचालन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।एयरलाइन ने दावा किया कि वह अब तक कलानिधि मारन और केएएल एयरवेज को कुल 730 करोड़ रुपये का भुगतान कर चुकी है, जिसमें 580 करोड़ रुपये मूलधन और 150 करोड़ रुपये ब्याज शामिल हैं। शेष राशि भी अदालत के निर्देशानुसार जमा कराई जाएगी।
इस फैसले से स्पष्ट है कि अदालत पूर्व आदेशों के अनुपालन को लेकर सख्त रुख अपना रही है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि स्पाइसजेट शेष राशि कब तक जमा करती है और आगे की कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ती है।








