NCERT controversy
नई दिल्ली, एजेंसियां। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की आठवीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में शामिल एक विवादास्पद अध्याय को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी नाराजगी जताई है। सूत्रों के अनुसार पीएम मोदी ने मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में कहा कि बच्चों को क्या पढ़ाया जा रहा है, इसका पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए। बैठक के तुरंत बाद पीएम मोदी इजरायल के दौरे के लिए रवाना हुए थे।
शिक्षा मंत्री ने की कार्रवाई का आश्वासन
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी इस मामले में जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि सरकार न्यायपालिका का पूरा सम्मान करती है और किसी भी प्रकार से न्यायिक संस्था का अनादर करने का कोई इरादा नहीं है। प्रधान ने स्पष्ट किया कि जो कुछ हुआ उससे उन्हें दुःख है और पाठ्यक्रम में शामिल विवादास्पद अंश तैयार करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
विवादास्पद अध्याय और सुप्रीम कोर्ट की प्रतिक्रिया
एनसीईआरटी की किताब में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार, लंबित मुकदमे और न्यायाधीशों की कमी जैसी चुनौतियों का उल्लेख किया गया था। इस संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि न्यायपालिका को कमजोर करने और उसकी गरिमा को ठेस पहुंचाने का “सुनियोजित प्रयास” किया गया है। न्यायालय ने किताब की सभी प्रतियों और डिजिटल संस्करण को जब्त और हटाने का आदेश दिया। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने एनसीईआरटी के निदेशक और विद्यालय शिक्षा विभाग के सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी किया।
एनसीईआरटी की माफी और सुधार
एनसीईआरटी ने विवादित अंश के लिए माफी मांगी और कहा कि उपयुक्त प्राधिकरण से परामर्श लेकर इसे फिर से लिखा जाएगा। पाठ्यपुस्तक के वितरण को तुरंत रोक दिया गया और डिजिटल संस्करण भी हटा लिया गया। शिक्षा मंत्री ने बताया कि न्यायपालिका सर्वोच्च है और अदालत के निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।
सरकार की नाराजगी और आगे की कार्रवाई
सूत्रों के अनुसार, पाठ्यक्रम में विवादास्पद संदर्भों को लेकर सरकार बेहद नाराज है। इस मुद्दे पर कार्रवाई करते हुए दोषियों के खिलाफ जवाबदेही तय करने और आवश्यक कार्रवाई करने का आश्वासन दिया गया है। यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए है कि बच्चों को सटीक और जिम्मेदार शिक्षण सामग्री प्रदान की जाए और किसी भी तरह से न्यायपालिका की गरिमा पर प्रश्नचिन्ह न लगे।








