आखिरकार पिंजरे में कैद हुआ आदमखोर बाघ, नागपुर में एक महीने बाद वन विभाग को मिली सफलता

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Tiger attack Nagpur forest news

नागपुर, एजेंसियां। महाराष्ट्र के नागपुर जिले में आतंक का पर्याय बन चुका आदमखोर बाघ आखिरकार वन विभाग के पिंजरे में कैद हो गया। वन विभाग की टीम ने करीब एक महीने तक चले अभियान के बाद इस बाघ को ट्रेंकुलाइजर डार्ट की मदद से काबू में किया। जानकारी के अनुसार यह बाघ नागपुर जिले की पारशिवनी तहसील के कालभैरव पेठ जंगल क्षेत्र में लंबे समय से दहशत फैला रहा था। बाघ ने इलाके में कई मवेशियों को मारने के साथ-साथ दो मजदूरों को भी अपना शिकार बना लिया था, जिसके कारण आसपास के गांवों में डर का माहौल बना हुआ था।

एक महीने से चल रहा था अभियान

वन विभाग के मुताबिक करीब सात साल का यह बाघ ‘टीयूआई-25’ पिछले कई महीनों से इलाके में घूम रहा था। इसे पकड़ने के लिए विभाग की टीम पिछले एक महीने से लगातार सघन अभियान चला रही थी। आखिरकार बाघ की सटीक लोकेशन मिलने के बाद टीम ने उसे घेर लिया।

ट्रेंकुलाइजर डार्ट से किया गया काबू

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बाघ को देखते ही मौके पर मौजूद टीम ने ट्रेंकुलाइजर डार्ट मारकर उसे बेहोश किया। पूरी प्रक्रिया पशु चिकित्सकों की निगरानी में की गई। इसके बाद बाघ को सुरक्षित पिंजरे में बंद कर दिया गया। बाघ को पकड़ने के बाद उसे नागपुर के टाइगर ट्रांजिट सेंटर भेज दिया गया है, जहां उसकी निगरानी की जा रही है।

कई गांवों में फैला था खौफ

बताया जा रहा है कि यह बाघ कालभैरव पेठ, भागीमाहेरी, कान्हादेवी, टेकाडी पलासावली और नेऊरवाडा जैसे कई गांवों में आतंक फैला चुका था। इसकी दहशत के कारण किसान और मजदूर खेतों में काम करने जाने से भी डरने लगे थे। आदमखोर बाघ के पकड़े जाने के बाद क्षेत्र के लोगों ने राहत की सांस ली है।

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