Chandra grahan 2026: 3 मार्च को लगेगा साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण, जानें क्या करें और क्या नहीं

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Chandra grahan 2026

नई दिल्ली, एजेंसियां। इस साल का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को फाल्गुन पूर्णिमा के दिन लगने जा रहा है। पंचांग के अनुसार यह खगोलीय घटना धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती है। ज्योतिष शास्त्र में ग्रहण काल को संवेदनशील समय बताया गया है, इसलिए इस दौरान कुछ विशेष सावधानियां बरतने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि ग्रहण का प्रभाव मानव जीवन, प्रकृति और मानसिक स्थिति पर पड़ सकता है।

ग्रहण काल में भोजन से परहेज

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्र ग्रहण के दौरान भोजन करना या पानी पीना उचित नहीं माना जाता। कहा जाता है कि इस समय वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है। यदि पहले से भोजन तैयार हो, तो उसमें तुलसी के पत्ते डाल देने की परंपरा है, क्योंकि तुलसी को पवित्र और शुद्ध करने वाला माना जाता है।

शुभ कार्यों से बचें

ग्रहण के समय विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, सगाई या नया निवेश जैसे मांगलिक कार्य शुरू नहीं करने चाहिए। ज्योतिष के अनुसार, ग्रहण काल में आरंभ किए गए कार्यों में बाधाएं आ सकती हैं। इसलिए इस अवधि में किसी नए कार्य की शुरुआत टालने की सलाह दी जाती है।

गर्भवती महिलाएं रखें विशेष ध्यान

परंपराओं के अनुसार गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान विशेष सावधानी बरतने को कहा जाता है। उन्हें घर से बाहर न निकलने, तेज या नुकीली वस्तुओं जैसे चाकू, कैंची या सुई का प्रयोग न करने की सलाह दी जाती है। यह मान्यता सदियों से चली आ रही है।

पूजा-पाठ और ध्यान का महत्व

ग्रहण के समय सोना या शारीरिक संबंध बनाना भी वर्जित माना गया है। इसके बजाय मंत्र जाप, ध्यान और भगवान का स्मरण करना शुभ फलदायी माना जाता है। देवी-देवताओं की मूर्तियों, तुलसी के पौधे या पीपल और बरगद के पेड़ों को ग्रहण काल में न छूने की परंपरा भी प्रचलित है।

ग्रहण समाप्त होने के बाद क्या करें?

ग्रहण खत्म होने के बाद स्नान करना शुभ माना जाता है। घर में गंगाजल का छिड़काव करने और पूजा-अर्चना करने की भी परंपरा है। जरूरतमंदों को दान देने से नकारात्मक प्रभाव कम होने और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ने की मान्यता है।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य परंपराओं पर आधारित है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण अलग हो सकता है।

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