Commercial LPG crisis
नई दिल्ली, एजेंसियां। मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध के असर अब भारत में भी दिखाई देने लगे हैं। कमर्शियल Liquefied Petroleum Gas सिलेंडरों की अचानक कमी के कारण कई राज्यों में होटल, रेस्टोरेंट और उद्योगों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। महाराष्ट्र, कर्नाटक, पंजाब और हिमाचल प्रदेश सहित कई राज्यों में व्यावसायिक एलपीजी की सप्लाई प्रभावित हुई है। रिपोर्ट के अनुसार Bengaluru में गैस की कमी के चलते कई होटल और रेस्टोरेंट बंद हो गए हैं। वहीं Pune में गैस आधारित श्मशान घाटों को भी अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा है।
केंद्र सरकार ने जारी किया निर्देश
केंद्र सरकार ने एलपीजी कंपनियों को निर्देश दिया है कि फिलहाल 19 किलो, 47.5 किलो और 425 किलो के व्यावसायिक सिलेंडरों की रिफिलिंग रोक दी जाए। यह फैसला घरेलू एलपीजी की सप्लाई को प्राथमिकता देने के उद्देश्य से लिया गया है।
मिडिल ईस्ट संघर्ष से सप्लाई प्रभावित
बताया जा रहा है कि Middle East में चल रहे संघर्ष और तेल-गैस सप्लाई में आई रुकावट के कारण एलपीजी की वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसी वजह से भारत में भी कमर्शियल सिलेंडरों की उपलब्धता कम हो गई है।
कई राज्यों में असर
पंजाब– 8 मार्च से पूरे राज्य में नॉन-डोमेस्टिक एलपीजी सिलेंडरों की सप्लाई रोक दी गई है। इसमें 19 किलो के कमर्शियल पैक और बड़े इंडस्ट्रियल सिलेंडर शामिल हैं।
हिमाचल प्रदेश– बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ औद्योगिक क्षेत्र में व्यावसायिक एलपीजी की सप्लाई अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दी गई है। इससे पैकेजिंग, फार्मा और फूड प्रोसेसिंग जैसे उद्योग प्रभावित हो रहे हैं।
उत्तर प्रदेश– कानपुर और Ghaziabad में भी एलपीजी की डिलीवरी में देरी की शिकायतें सामने आई हैं। कई जगहों पर सिलेंडर की कालाबाजारी भी शुरू हो गई है, जहां 1400 से 1500 रुपये तक में सिलेंडर बेचे जा रहे हैं।
झारखंड– Jhumri Telaiya में भी गैस एजेंसियों ने नई व्यवस्था लागू की है, जिसके तहत अब उपभोक्ता 25 दिन बाद ही अगला सिलेंडर बुक कर पाएंगे।
नियम भी किए गए सख्त
एलपीजी कंपनियों ने स्टॉक बचाने के लिए नियम सख्त कर दिए हैं। अब ग्राहक पिछली डिलीवरी के 21 से 25 दिन बाद ही नया घरेलू सिलेंडर बुक कर सकते हैं। साथ ही डिलीवरी के समय OTP या बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन भी अनिवार्य किया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में गैस की किल्लत और बढ़ सकती है, जिससे हॉस्पिटैलिटी सेक्टर और उद्योगों पर बड़ा असर पड़ सकता है।









