Kerala name change controversy:
नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्र सरकार ने राज्य का आधिकारिक नाम ‘केरल’ से बदलकर ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अब इस प्रस्ताव को अंतिम रूप से लागू करने के लिए संसद की स्वीकृति आवश्यक होगी। इसी बीच तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इस बदलाव पर हल्के-फुल्के अंदाज में भाषाई सवाल उठाया है अगर राज्य का नाम ‘केरलम’ होगा, तो अंग्रेजी में ‘केरलाइट’ शब्द का क्या होगा?
थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि “सब अच्छा है, लेकिन हमारे जैसे अंग्रेजी बोलने वालों के लिए एक छोटा-सा भाषाई सवाल है। अब ‘केरलाइट’ और ‘केरलन’ जैसे शब्दों का क्या होगा?” उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि ‘केरलामाइट’ किसी माइक्रोब जैसा सुनाई देता है, जबकि ‘केरलामियन’ किसी दुर्लभ खनिज की तरह लगता है। उन्होंने यह भी चुटकी ली कि शायद राज्य के मुख्यमंत्री इस नए शब्द के लिए कोई प्रतियोगिता ही शुरू कर दें।
सभी दलों का समर्थन, संसद की मंजूरी बाकी
राज्य विधानसभा पहले ही नाम परिवर्तन का प्रस्ताव पारित कर केंद्र को भेज चुकी थी। केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब इसे संसद में पेश किया जाएगा। राज्य की प्रमुख राजनीतिक शक्तियां सीपीएम के नेतृत्व वाला एलडीएफ, कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ और बीजेपी सभी इस बदलाव के समर्थन में हैं।
बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने नाम परिवर्तन का समर्थन करते हुए कहा कि ‘केरलम’ राज्य की परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान को पुनर्स्थापित करेगा। उनके मुताबिक, यह बदलाव मलयालम उच्चारण और ऐतिहासिक मूल के अधिक करीब है।
‘केरलम’ का अर्थ और पृष्ठभूमि
मलयालम भाषा में ‘केरा’ का अर्थ नारियल का पेड़ और ‘अलम’ का अर्थ भूमि या भूभाग होता है। इस प्रकार ‘केरलम’ का अर्थ हुआ ‘नारियल की भूमि’। कुछ इतिहासकार इसे प्राचीन ‘चेर’ राजवंश से भी जोड़ते हैं और मानते हैं कि ‘केरलम’ शब्द ‘चेरम’ का विकसित रूप है।
1956 में भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन के दौरान अंग्रेजी में इसे ‘Kerala’ लिखा गया, जिससे हिंदी में ‘केरल’ नाम प्रचलित हो गया। अब राज्य अपनी मूल भाषाई पहचान के अनुरूप नाम अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। हालांकि, थरूर के उठाए भाषाई प्रश्न ने इस बदलाव को लेकर नई चर्चा जरूर छेड़ दी है।








