EBV virus infection
नई दिल्ली, एजेंसियां। बीते कुछ वर्षों में दुनिया भर में संक्रामक बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ा है। कोविड-19 महामारी जिसने दुनिया भर के विधि-व्यवस्था तो बदल कर रख दिया। इस महामारी ने कई परिवार उजाड़े, कितने लोगों ने अपनी जान गवाई और जानें कितने बच्चे अनाथ हुए। अब तक कोरोना महामारी का डर लोगों के मन से पूरी तरह गया भी नहीं कि एक बार फिर एक वायरस ने दुनिया में दस्तक दिया है। विशेषज्ञ एक इस वायरस को लेकर लोगों को सतर्क कर रहे हैं।
वैज्ञानिकों के अनुसार
वैज्ञानिकों के अनुसार, यह वायरस नया नहीं है, लेकिन इसकी प्रकृति ऐसी है कि एक बार संक्रमण होने के बाद यह जीवनभर शरीर में निष्क्रिय अवस्था में मौजूद रह सकता है। अनुमान है कि दुनिया की 90–95% वयस्क आबादी कभी न कभी इससे संक्रमित हो चुकी है।
क्यों है चिंता का विषय?
विशेषज्ञ बताते हैं कि EBV कोरोना वायरस जितना आक्रामक नहीं है, इसलिए अधिकांश मामलों में इसके लक्षण हल्के या न के बराबर होते हैं। कई लोगों को तो पता भी नहीं चलता कि वे संक्रमित हो चुके हैं।
हालांकि चिंता की बात यह है कि
- एक बार संक्रमण के बाद वायरस शरीर में स्थायी रूप से रह सकता है।
- कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों में इसके दुष्प्रभाव ज्यादा गंभीर हो सकते हैं।
- कुछ अध्ययनों में इसे कुछ प्रकार के कैंसर के जोखिम से भी जोड़ा गया है।
कैंसर से संबंध
शोधों में पाया गया है कि EBV का संबंध कुछ दुर्लभ लेकिन गंभीर कैंसर से हो सकता है,
- Burkitt lymphoma
- Hodgkin lymphoma
- Nasopharyngeal carcinoma
हालांकि यह स्पष्ट करना जरूरी है कि EBV से संक्रमित हर व्यक्ति को कैंसर नहीं होता। जोखिम कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करता है, जैसे आनुवंशिक प्रवृत्ति और इम्यून सिस्टम की स्थिति।
कैसे फैलता है EBV?
यह वायरस मुख्य रूप से लार (saliva) के माध्यम से फैलता है। इसे कभी-कभी “किसिंग डिजीज” भी कहा जाता है। बच्चों में संक्रमण अक्सर हल्का रहता है, जबकि किशोरों और युवाओं में यह संक्रामक मोनोन्यूक्लिओसिस (Infectious Mononucleosis) का कारण बन सकता है, जिसमें बुखार, गले में खराश और थकान जैसे लक्षण दिखते हैं।
कैसे करें बचाव?
व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखें। बर्तन, बोतल या टूथब्रश साझा करने से बचें। इम्यून सिस्टम मजबूत रखने के लिए संतुलित आहार और पर्याप्त नींद लें। विशेषज्ञों का कहना है कि EBV को लेकर जागरूकता बढ़ाना जरूरी है, क्योंकि यह भले ही अक्सर गंभीर लक्षण न दिखाए, लेकिन दीर्घकालिक स्वास्थ्य जोखिमों से जुड़ा हो सकता है।








