क्रूड ऑयल में बड़ी गिरावट, $87 के नीचे पहुंचा ब्रेंट

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Crude oil prices today

नई दिल्ली, एजेंसियां। बुधवार को वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। रिपोर्ट्स के अनुसार अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी द्वारा आपातकालीन तेल भंडार जारी करने की संभावना के बाद बाजार में भारी हलचल देखने को मिली।

इसके चलते Brent Crude Oil की कीमत लगभग 0.99 प्रतिशत गिरकर 86.93 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। वहीं अमेरिकी बेंचमार्क West Texas Intermediate (WTI) वायदा भी 0.75 प्रतिशत गिरकर 82.82 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता नजर आया।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह गिरावट हाल के दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में आई सबसे बड़ी गिरावटों में से एक मानी जा रही है।

चार वर्षों में सबसे बड़ी गिरावट

मंगलवार रात को वैश्विक तेल बाजार में बड़ी हलचल देखने को मिली थी। दोनों प्रमुख बेंचमार्क में 11 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, जो पिछले चार वर्षों में एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट बताई जा रही है।
इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण International Energy Agency द्वारा आपातकालीन तेल भंडार जारी करने की योजना है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एजेंसी दुनिया भर में तेल की आपूर्ति को स्थिर करने के लिए बड़े स्तर पर तेल बाजार में उतारने पर विचार कर रही है।

आपातकालीन तेल भंडार जारी करने की तैयारी

बताया जा रहा है कि प्रस्तावित तेल रिलीज 2022 में Russia‑Ukraine War के दौरान जारी किए गए 18.2 करोड़ बैरल तेल के रिकॉर्ड को भी पार कर सकती है।
G7 देशों ने आईईए से इस संबंध में विस्तृत योजना तैयार करने को कहा है ताकि वैश्विक आपूर्ति में आई कमी को दूर किया जा सके और कीमतों को स्थिर रखा जा सके।

अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी थी कीमतें

दरअसल जनवरी से United States और Iran के बीच बढ़ते तनाव के कारण तेल की कीमतों में तेज उछाल आया था। खासकर Strait of Hormuz के बंद होने की आशंका ने बाजार में घबराहट पैदा कर दी थी।
यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि दुनिया के कुल तेल परिवहन का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। इस मार्ग में बाधा आने से टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई और कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई थीं।

ट्रंप के बयान से बाजार में आई राहत

हालांकि हाल ही में डोनाल्ड ट्रम्प के बयान के बाद बाजार में कुछ राहत देखने को मिली है। उन्होंने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में किसी प्रकार की माइन्स बिछाई गई हैं तो उन्हें तुरंत हटाया जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक स्तर पर आपूर्ति सामान्य होती है और तनाव कम होता है तो इसका असर भारत सहित कई देशों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी पड़ सकता है।

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