Holi beyond Mathura:
नई दिल्ली, एजेंसियां। होली का त्योहार इस बार 4 मार्च को मनाया जाएगा। मथुरा और वृंदावन की होली देशभर में अपनी लठमार और फूलों वाली परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। लेकिन सिर्फ इन शहरों तक ही होली सीमित नहीं है। भारत के कई हिस्सों में होली का जश्न अलग रंग, रूप और संस्कृति के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार सिर्फ रंग लगाने तक ही सीमित नहीं, बल्कि दिलों से दूरियां मिटाने, पुराने गिले-शिकवे भूलने और रिश्तों में मिठास घोलने का अवसर भी है।
बरसाना की लठमार होली
बरसाना की होली दुनियाभर में ‘लठमार होली’ के नाम से मशहूर है। यहां महिलाएं प्रतीकात्मक रूप से पुरुषों पर लाठियां बरसाती हैं और पुरुष ढाल लेकर खुद को बचाते हैं। यह परंपरा राधा-कृष्ण की लीलाओं से जुड़ी मानी जाती है। 25 फरवरी को बरसाना की लठमार होली मनाई जाएगी। रंग और भक्ति का यह संगम इसे देखने लायक बनाता है।
वाराणसी में रंग, भांग और ठंडाई
काशी की होली में आध्यात्म और मस्ती का अनूठा मेल देखने को मिलता है। गंगा घाटों पर रंग, संगीत, भांग और ठंडाई की धूम रहती है। शिवभक्तों की टोली, ढोल-नगाड़ों की गूंज और घाटों पर उड़ता गुलाल वाराणसी की होली को बेहद खास बनाते हैं।
शांतिनिकेतन की सांस्कृतिक होली
पश्चिम बंगाल के शांतिनिकेतन में होली को बसंत उत्सव के रूप में मनाया जाता है। छात्र-छात्राएं पीले वस्त्र पहनकर गीत, नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए वसंत और होली का स्वागत करते हैं। यह होली शोर-शराबे से ज्यादा कला और सौंदर्य की पहचान रखती है।
उदयपुर की शाही होली
उदयपुर की होली शाही अंदाज और मेवाड़ की परंपराओं के लिए जानी जाती है। यहां होलिका दहन, भव्य जुलूस, राजसी पोशाकें, सजे-धजे हाथी-घोड़े और लोकनृत्य होली को एक शाही उत्सव बनाते हैं। शाही फील और राजसी माहौल का अनुभव लेने के लिए उदयपुर की होली जरूर देखनी चाहिए।
प्रयागराज की धूमधड़ाके वाली होली
संगम नगरी प्रयागराज में कपड़ा फाड़ होली काफी मशहूर है। मोहल्लों में सामूहिक होली खेली जाती है, जिसमें पुरुष एक-दूसरे के कपड़े फाड़ते हैं। म्यूजिक और मेल-मिलाप के साथ यह होली अपने अलग और रोमांचक अंदाज के लिए जानी जाती है।
भारत में होली का हर शहर अपने अनूठे अंदाज और संस्कृति के साथ इसे मनाता है। मथुरा-वृंदावन से आगे जाकर इन जगहों की होली देखने का अनुभव बिल्कुल अलग और रंगीन होता है।







