फास्ट फॉरवर्ड लाइफस्टाइल कहीं न कहीं पुरुष और महिला दोनों की सेहत पर काफी असर डालती है। एक उम्र के बाद हर व्यक्ति को स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। पुरुषों की तुलना में महिलाएं अधिक बीमार पड़ती हैं। विज्ञान के अनुसार महिलाओं की शारीरिक संरचना पुरूषों की अपेक्षा काफी जटिल है, क्यों वे जीवनदायिनी हैं, वे मां बनती हैं और बच्चों को जन्म देती हैं। महिलाओं का खुद के स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही।
दरअसल दफ्तर और घर परिवार को लेकर इतना व्यस्त रहती हैं कि वे अपने स्वास्थ और शरीर पर अधिक ध्यान देने का वक़्त नहीं निकाल पाती हैं। जिससे बढ़ती उम्र के साथ आम तौर पर महिलाएं कुछ ऐसी बीमारियों का शिकार हो जाती हैं जो की जानलेवा भी होती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार महिलाओं को कुछ बीमारियों का खतरा ज्यादा रहता है।
अगर उन बीमारियों को वक्त रहते समझ लिया जाए तो आसानी से जिंदगी का बचाव किया जा सकता है। आइए जानते हैं कि कौन-कौन सी ऐसी बीमारियां हैं जो तेज़ी से महिलाओं को अपनी चपेट में लेती है।
- एनीमिया
देश में लगभग 60 प्रतिशत महिलाएं काम में इतनी व्यस्त हो जाती हैं कि वह खुद पर भी ध्यान नहीं देती हैं। इसका असर सीधा उनकी सेहत पर पड़ता है। महिलाएं खुद को लेकर इतनी लापरवाही करती हैं, जिससे उनको खून की कमी जैसी बीमारियों का सामना करना पड़ता है। अक्सर गर्भावस्था के वक्त भी महिलाएं पौष्टिक खाना नहीं खाती जिससे, मां और बच्चे दोनों को कुपोषण का शिकार होना पड़ता है।
एनीमिया से बचाव के उपाय :
पालक में कैल्शियम, विटमिन ए, विटमिन बी9, विटमिन ई, विटमिन सी, आयरन, फाइबर, बीटा कैरोटीन होता है जो शरीर को स्वस्थ रखता है। सोयाबीन आयरन और प्रोटीन से युक्त होता है और लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण करने में मदद करता है। लाल रंग का चुकंदर आयरन युक्त होता है। यह आपके लाल रक्त कोशिकाओं को ठीक करने के साथ ही कोशिकाओं को दोबारा सक्रिय बनाता है।
टमाटर में विटमिन सी और लाइकोपीन होता है जो आयरन का अवशोषण करने में मदद करता है। अंडे में प्रोटीन और ऐंटिऑक्सिडेंट्स होते हैं जो शरीर के विटामिन की कमी को पूरा करने में मदद करता है।
- पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम
पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम एक प्रकार का मेटाबॉलिक डिसऑर्डर है, जो महिलाओं में हार्मोन्स को असंतुलित करता है। इस स्थिति में ओवरी में पानी से भरी कई छोटी-छोटी ग्रंथियां बनने लगती हैं, जिसे पॉलीसिस्टिक ओवरी कहते हैं। इतना ही नहीं इंसुलिन की अधिक मात्रा, अनुवांशिकता और लो-ग्रेड इन्फ्लेमेशन भी पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम के कारण हो सकते हैं।
पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम से बचने के उपाय :
हालांकि इस समस्या को पूरी तरह ठीक करना मुश्किल है। फिर भी आप कुछ बातों का ध्यान रखकर पीसीओएस से खुद का बचाव कर सकती हैं। खासतौर पर आपको अपनी जीवनशैली में बहुत बदलाव लाने होंगे। पीसीओएस से बचाव के लिए खाने में हाई फाइबर वाले खाद्य पदार्थों को शामिल करें।
जैसे- ब्रोकली, फूलगोभी, पालक। बादाम, अखरोट, ओमेगा और फैटी एसिड से भरपूर चीजें खाएं। तीन वक्त अधिक भोजन करने की बजाए कम मात्रा में पांच बार खाना खाएं। इससे मेटाबॉलिज्म ठीक रहेगा।
- पॉलीसिस्टिक ओवरी डिसऑर्डर
पीसीओडी यानी पॉलीसिस्टिक ओवरी डिसऑर्डर एक ऐसी मेडिकल स्टेट है, जिसमें ओवरी समय से पहले एग्स रिलीज कर देता है, जो सिस्ट में बदल जाते हैं। पीसीओडी की स्थिति में महिलाओं की ओवरी का आकार बड़ा हो जाता है। पीसीओडी महिलाओं में एंड्रोजन यानी पुरुष हार्मोन की अधिकता से होने वाली समस्या है।
पॉलीसिस्टिक ओवरी डिसऑर्डर से बचने के उपाय :
हालांकि पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम यानि PCOS की तरह पीसीओडी से भी महिलाएं पूरी तरह ठीक नहीं हो सकती। लेकिन कुछ हद तक तनाव न लेने से या वजन को नियंत्रण में रखने और हेल्दी खाना खाने की आदत डालने से इसे नियंत्रण में रख सकते हैं। योग या व्यायाम को अपनी लाइफस्टाइल में जरूर शामिल करें। और हमेशा खुश रहने की कोशिश करें।
- सर्वाइकल कैंसर
आंकड़ों के अनुसार, भारत में सर्वाइकल कैंसर के लगभग 1,22,000 नए मामले हर साल सामने आते हैं, जिसमें लगभग 67,500 महिलाएं होती हैं। कैंसर से संबंधित कुल मौतों का 11.1 प्रतिशत कारण सर्वाइकल कैंसर ही है। यह स्थिति और भी खराब इसलिए हो जाती है कि देश में मात्र 3.1 प्रतिशत महिलाओं की इस हालत के लिए जांच हो पाती है, जिससे बाकी महिलाएं खतरे के साये में ही जीती हैं।
सर्वाइकल कैंसर से बचने के उपाय :
सबसे पहले सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए महिलाओं को नियमित रूप से पैप स्मीयर टेस्ट करवाना चाहिए। इस टेस्ट में गर्भाशय ग्रीवा की कोशिकाओं में होने वाले असामान्य बदलावों का पता लगाया जा सकता है। 21 साल के बाद हर महिला को डॉक्टर की सलाह पर यह टेस्ट हर छह महीने या साल के अंतराल में करवाना चाहिए। एचपीवी वैक्सीन ह्यूमन पेपिलोमावायरस (एचपीवी) शारीरिक संबंध बनाने से फैलने वाला एक आम वायरस है।
यह सर्वाइकल कैंसर का एक मुख्य कारण माना जा सकता है। इससे बचाव के लिए महिलाओं को एचपीवी वैक्सीन लेनी चाहिए। शारीरिक संबंध बनाने से पहले युवाओं को इसे लगाना चाहिए। यौन संचारित संक्रमण और एचपीवी इंफेक्शन से बचाव के लिए आप सुरक्षित शारीरिक संबंध बनाएं। इससे सर्वाइकल कैंसर का जोखिम काफी हद तक कम हो जाता है। साथ ही, अन्य रोग होने की संभावना कम हो जाती है।
धूम्रपान भी सर्वाइकल कैंसर का एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक माना जा सकता है। धूम्रपान छोड़ने से न केवल सर्वाइकल कैंसर का खतरा कम होता है, बल्कि कई अन्य फायदे भी मिलते हैं। नियमित शारीरिक गतिविधियां सर्वाइकल कैंसर सहित विभिन्न कैंसर के जोखिम को कम कर सकती है। एक्सरसाइज से वजन को कंट्रोल करने में मदद मिलती है। साथ ही, इम्यून सिस्टम में सुधार होता है।
- विटामिन-डी की कमी
जर्नल ऑफ फॅमिली मेडिसिन की रिपोर्ट के अनुसार, देश में लगभग 70 प्रतिशत महिलाओं में विटामिन-डी की कमी होती है। विटामिन-डी की कमी से शरीर में कई समस्याएं हो जाती हैं। बिना काम किए ही जल्दी थकना, जोडों में दर्द की शिकायत, पैरों में सूजन, मांसपेशियों में कमजोरी जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसकी वजह यह है कि महिलाएं अपना सारा वक्त घर के काम में लगा देती हैं और साथ ही वह धूप में जाना पसंद नहीं करती हैं।
विटामिन-डी की कमी को दूर करने के उपाय :
अपने खानपान में मछली, अनाज, मशरुम, अंडे, पनीर, दूध और संतरे का रस शामिल करने से विटामिन-डी कि कमी दूर की जा सकती है।
- स्तन कैंसर
महिलाएं खुद अपने स्तन के आकार में बदलाव महसूस कर सकती हैं और साथ ही उसमें होने वाली गांठ, स्तन में दर्द महसूस होना, स्तन से खून आना, स्तन में सूजन और उसका लाल होना, इसके लक्षण नज़र आते हैं। वर्ष 2012 की एक सर्वे के रिपोर्ट के अनुसार पूरे विश्व में स्तन कैंसर के साढ़े दस लाख नए मरीज पाए गए हैं जिसमें स्तन कैंसर से 3.73 लाख की मृत्यु हो चुकी है। भारत में पिछले वर्ष स्तन कैंसर होने की औसतन उम्र 30 से 50 वर्ष तक पाई गई है।
स्तन कैंसर से बचने के उपाय :
वजन को कंट्रोल कर ब्रेस्ट कैंसर से बचा जा सकता है। 30-35 साल की उम्र की महिलाओं को अपने वजन को संतुलित रखना चाहिए। शराब या स्मोकिंग का सेवन ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को बढ़ाता है। इसलिए इनसे परहेज रखें। नियमित एक्सरसाइज या फिजिकल एक्टीविटी कर भी ब्रेस्ट कैंसर को कंट्रोल किया जा सकता है।
कोशिश करें कि दिन में सुबह या शाम एक्सरसाइज जरूर करें। अपने लाइफस्टाइल में योग और मेडिटेशन को प्राथमिकता दें। इससे ब्रेस्ट कैंसर का खतरा कम होता है। अपनी डाइट को भी संतुलित रखें। अपने खाने में ज्यादा से ज्यादा फल और सब्जियों को शामिल करें। खुद को हाइड्रेट रखने के लिए रोज 8 से 10 ग्लास पानी पीएं।
- यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन या यूटीआई (Urinary tract infection or UTI)
यूरिनरी सिस्टम के किसी भी हिस्से में होने वाला संक्रमण (infection) है। यह सबसे आम संक्रमणों में से एक है जो सभी उम्र के पुरुषों और महिलाओं दोनों में हो सकता है। हालांकि, सामान्य तौर पर महिलाओं में पुरुषों की तुलना में मूत्र पथ (urine path) के संक्रमण का खतरा अधिक होता है और वयस्कों में युवा लोगों की तुलना में मूत्र पथ के संक्रमण के विकसित होने की संभावना अधिक होती है।
जबकि एंटीवायरल और एंटिफंगल दवाओं का उपयोग वायरस और कवक संक्रमण (fungal infection) के इलाज के लिए किया जाता है।
महिलाओं को अपनी सेहत का ध्यान रखना बहुत जरूरी है, क्योंकि उनकी जीवनशैली और कई कारणों से वे कई गंभीर बीमारियों का शिकार हो सकती हैं। जैसे एनीमिया, पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS), सर्वाइकल कैंसर, स्तन कैंसर, और यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI)। इन बीमारियों से बचने के लिए महिलाओं को समय-समय पर स्वास्थ्य जांच करवानी चाहिए, सही खाना खाना चाहिए, व्यायाम करना चाहिए और मानसिक रूप से भी स्वस्थ रहना चाहिए।
विटामिन-डी की कमी और खून की कमी जैसे सामान्य समस्याओं पर भी ध्यान देना जरूरी है। अगर महिलाएं अपनी जीवनशैली में कुछ बदलाव करती हैं, तो वे इन बीमारियों से बच सकती हैं और एक स्वस्थ जीवन जी सकती हैं।
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