रांची : एक समय था जब भारत में ऐसे भी नोट छपते थे जो यहां नहीं चलते थे। इन नोटों को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानि आरबीआई छापता था। इन नोटों पर रिज़र्व बैंक की गारंटी भी लिखी होती थी और गवर्नर के हस्ताक्षर भी होते थे।
इन खास नोटों को हज नोट कहा जाता था। ये नोट 11 मई 1959 को 1, 5, 10 और 100 रुपये के मूल्य वर्ग में छपे गए थे। इन्हें भारत से हज यात्रा में मक्का जाने वाले यात्रियों के लिए छापा गया था।
उस समय रियाल जो सऊदी अरब की मुद्रा थी के बराबर ही इन भारतीय नोटों का मूल्य था। ऐसे हज नोटों में 1 रुपए का नोट वित्त सचिव ए के राय तथा 5 रुपए , 10 और 100 रुपए मूल्य का नोट तत्कालीन रिजर्व बैंक के गवर्नर एचवीआर अयंगर के हस्ताक्षर से जारी हुआ था।
1 रुपए का नोट बी इनसेट में , 5 रुपए वाला प्लेन इनसेट में , 10 रुपए वाला ए इनसेट में तथा 100 रुपए वाला प्लेन इनसेट में छपा गया। इन सब के लिए जेड प्रीफिक्स का प्रयोग किया गया था।
ये नोट उस समय भारत में प्रचलित नोट के आकार-प्रकार के थे। केवल इनका रंग गुलाबी था। ऐसे हज नोटों को अरब देशों ने जैसे कुवैत ने 1961 से, बहरीन ने 1965 से तथा कतर के साथ साथ अन्य देशों ने 1966 से लेना बंद कर दिया।
इसलिए भारत सरकार ने इसे फिर नहीं छापा। चूंकि ये कम छपे, फिर भारत में प्रयोग में भी नही लाए गए इसलिए इनकी उपलब्धता कम होने के चलते ये महंगे हो गए।
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