प्रयागराज, एजेंसियां। महाकुंभ एक अनोखे संयोग के कारण भी ऐतिहासिक बन गया है। इस महापर्व के एक महीने में 21 नवजातों का जन्म हुआ। इनमें 12 बेटे और 9 बेटियां हैं।
सभी शिशुओं का जन्म सामान्य प्रसव से हुआ। किसी को सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ी। बच्चों के नाम भी धार्मिक नामों पर रखे गए हैं। वैदेही, कुंभ, गंगा, यमुना, सरस्वती और नंदी रखे गए हैं।
ये सभी महिलाएं अपनी प्रेग्नेंसी के आखिरी दौर में महाकुंभ स्नान के लिए आई थीं। सभी बच्चों का जन्म महाकुंभ मेले में सेक्टर-2 में बनाए गए 100 बिस्तर के सेंट्रल हॉस्पिटल में हुआ है। यहां पर ICU से लेकर डिलीवरी रूम तक की हाईटेक व्यवस्था है।
सबसे पहले बच्चे का जन्म 29 दिसंबर 2024 को मेले की तैयारियों के दौरान हुआ था। उसका नाम कुंभ रखा गया। अगले ही दिन एक बच्ची ने जन्म लिया, नाम दिया गया गंगा। बच्चों को जन्म देनेवाली सभी महिलाएं प्रयागराज से बाहर की है। कुछ दूसरे शहरों से तो कुछ दूसरे राज्यों से आईं।
महाकुंभ 2025 में देश-दुनिया से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए कुछ ना कुछ विशेष रहा है। सबकी अपनी अपनी यादें और अनुभव रहे हैं। महाकुंभ उन 21 महिलाओं के लिए ऐतिहासिक और आजीवन यादगार बन गया, जिन्होंने बच्चों को जन्म दिया है।
खास बात ये है कि इन बच्चों के नाम पौराणिक नाम के आधार पर वैदेही, गंगा, यमुना, सरस्वती, संगम, कुंभ, राधा, कृष्ण रखे गए हैं। महाकुंभ में पैदा होने वाले ये सारे बच्चे स्वस्थ हैं और 19 लोगों को अब अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। रविवार को 20वीं बच्ची पैदा हुई है, जिसका नाम वैदेही रखा गया।
बिना ऑपरेशन की हुई सभी डिलीवरी :
सेंट्रल अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मनोज कौशिक के अनुसार महाकुंभ में स्नान करने आईं अब तक 21 महिलाओं का सुरक्षित और बिना ऑपरेशन के प्रसव कराया गया है।
अभिभावकों की सहमति पर महाकुंभ में पैदा होने वाले बच्चों के नाम पौराणिक नाम के आधार पर रखे गए हैं। बीते शनिवार को 18वीं बच्ची पैदा हुई थी और उसका नाम सीता रखा गया था।
सभी डिलीवरी निशुल्क हुईं : CHC संडीला
हरदोई से महाकुंभ में ड्यूटी करने आईं डॉ. सरोज कुशवाहा के अनुसार सभी जच्चा और बच्चा स्वस्त हैं। यहां सभी की निःशुल्क डिलीवरी की गई है।
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