राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनेंगे या नहीं, क्या कहती है कुंडली [Will Rahul Gandhi become Prime Minister or not, what does the horoscope say?]

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2029 में चांस नहीं के बराबर

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय राजनीति में राहुल गांधी विपक्ष की ओर से प्रधानमंत्री पद के लिए एक मजबूत चेहरा है, जो पिछले तीन बार के लोकसभा चुनाव में अपनी दावेदारी को प्रत्यक्ष करने में जी-जान से लगे हैं, लेकिन सफल नहीं हो पाए।

कांग्रेस पार्टी और पार्टी कार्यकर्ता राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनते हुए देखने के लिए काफी उतावले हैं लेकिन हर बार उनको निराशा ही हाथ लगी है।

ऐसे में यह जिज्ञासा होना स्वाभाविक है कि क्या कभी राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनेंगे?

आइए ज्योतिष के दैवीय प्रकाश के माध्यम से भविष्य के गर्भ में झांकने का प्रयास करते हैं कि राहुल गांधी कभी प्रधानमंत्री बन पाएंगे या नहीं?

राहुल गांधी की जन्म कुंडली

राहुल गांधी का जन्म 19 जून 1970 में दोपहर 2 बजकर 28 मिनट पर दिल्ली में हुआ था। उस समय पूर्वी क्षितिज पर तुला राशि का उदय हुआ था।

एक नीच भंग राजयोग और एक विपरीत राजयोग कुंडली में बना हुआ है। तुला लग्न के लिए योगकारक शनि अपनी नीच राशि मेष में सप्तम भाव में बैठे हैं और उनका नीच भंग हो रहा है।

द्वादशेश बुध अष्टम भाव में बैठे हैं, जो विमल नामक विपरीत राजयोग बना रहे हैं। लग्नेश शुक्र उन्नति के दशम भाव में बैठे हैं और लग्न में नैसर्गिक शुभ ग्रह गुरु बैठे हैं, जो लगातार निराशाजनक परिणाम के बाद भी राहुल गांधी को लड़ने की शक्ति दे रहे हैं और पार्टी का उनको साथ भी मिल रहा है।

क्या राहुल गांधी की कुंडली में प्रधानमंत्री बनने के योग हैं?

आज तक जितने भी प्रधानमंत्री हमारे देश में हुए हैं उन सभी की कुंडली में कुछ ग्रह योगों में समानता है।

जैसे दशमेश कि दशम भाव से स्थिति और राजनीतिक सत्ता के कारक सूर्य की दशम भाव से स्थिती, दशम भाव राज सत्ता का भाव हैं।

लगभग सभी प्रधानमंत्री की जन्म कुंडली में दशमेश और सूर्य दशम भाव से केंद्र या त्रिकोण भावों में बैठे हैं।

अधिकतर मामलों में दशमेश या सूर्य दोनों का ही दशम भाव पर स्थिती या दृष्टि द्वारा प्रभाव है। लगभग सभी के मामलों में दशम भाव पर गुरु का भी प्रभाव पाया गया है। भाग्य के नवम भाव के स्वामी की स्थिति भी लग्न और नवम भाव से अच्छी देखी गई है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सही समय पर उन्नति प्रदान करने वाले ग्रहों की दशा, अंतर्दशा आना जो अंततः भाग्य ही तय करता है।

सभी मामलों में जब वे प्रधानमंत्री बने तब लग्न, पंचम, नवम या फिर दशम भाव के स्वामी ग्रहों की दशा अंतर्दशा चल रही थी।

अधिकतर मामलों में लग्न से त्रिकोण भावों के स्वामी की ही चल रही थी। अगर यह सब सिद्धांत राहुल गांधी की जन्म कुंडली पर लगाकर देखें तो इन में से उनकी कुंडली पर एक भी लागू होते नहीं दिख रहा है।

केवल दशा अंतर्दशा वाला सिद्धांत आगे 2029 में लगते दिख रहा है। राहुल गांधी की कुंडली में दशमेश चंद्रमा दशम भाव से छठे भाव में है और उसका दशम भाव से कोई संबंध नहीं है।

सूर्य दशम भाव से द्वादश भाव में है, जो दशम भाव से अशुभ स्थिति है। गुरु का भी दशम भाव पर सीधा प्रभाव नहीं है। यह सब नकारात्मक बिंदु है, जो उनके प्रधानमंत्री बनने की संभावना को कमजोर करते हैं।

राहुल गांधी की आने वाली दशा अंतर्दशाएं

राहुल गांधी पर अभी राहु की दशा चल रही है, जो अप्रैल 2037 तक चलेगी। इस अवधि में सभी ठीक रहा तो दो लोकसभा चुनाव होने की संभावना बन रही है।

राहु पंचम भाव में बैठे हैं और नैसर्गिक शुभ ग्रह गुरु की दृष्टि में है। ज्योतिष के प्राचीन ग्रंथ लघु पाराशरी के सिद्धांतानुसार राहु केतु तभी योगकारक प्रभाव देते हैं, जब वे केंद्र में बैठे हों और त्रिकोण भावों के स्वामी के प्रभाव में हो या फिर त्रिकोण भावों में बैठे हो और केंद्र भावों के स्वामी के प्रभाव में हो।

इसलिए यहा राहु योगकारक प्रभाव देने के लिए बाध्य नहीं है। पर हां वह त्रिकोण भाव में बैठे हैं और उसका राशि दिग्बली होकर नीचभंग राजयोग बना रहा है। इसलिए शुभ परिणाम देने कि क्षमता राहु में निश्चित रूप से है।

साल 2029 के लोकसभा चुनाव में कैसी रहेगी स्थिति

अगर बात साल 2029 के लोकसभा चुनाव की जाए तो तब राहुल गांधी की राहु दशा में बुध की अंतर्दशा चल रही होगी।

यह बुध द्वादशेश होकर अष्टम भाव में बैठकर विपरीत राजयोग का निर्माण कर रहा है। अष्टम भाव अचानक, आश्चर्यजनक परिणाम देने के लिए भी विख्यात है।

मतलब ऐसा कि सभी को लगेगा कि काम होना निश्चित है, तब अचानक काम बिगड़ जाएगा और जब सबको लगे की काम बनना मुश्किल है तब अचानक काम बन जाएगा।

तो अष्टम भाव में बैठे बुध, जो भाग्य भाव के स्वामी भी हैं, जो राहुल गांधी को अब तक के मुकाबले सबसे अधिक मजबूती के साथ प्रधानमंत्री पद का दावेदार बनाएंगे।

पर शनि और सूर्य मंगल के बीच में पाप कर्तरी योग में बैठे होना और भाग्य भाव के स्वामी होकर अष्टम भाव में बैठना इनकी ऐसी कमजोरी है, जो शायद ही वे दूर कर पाएं।

ऐसे में यह आशंका बन रही है कि राहुल गांधी प्रधानमंत्री नहीं बनेंगे या फिर बन भी जाते हैं तो बहुत कम अवधि तक के लिए बन पाएंगे, जो पांच वर्ष का कार्यकाल किसी कारणवश पूरा नहीं कर पाएंगे।

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