Insulin needed in diabetes:
नई दिल्ली, एजेंसियां। डायबिटीज आज के समय में तेजी से बढ़ती गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है। जिन लोगों का ब्लड शुगर अक्सर अधिक रहता है, उनके लिए इसे कंट्रोल करना बेहद जरूरी है, वरना किडनी, आंखों, तंत्रिकाओं और हृदय पर गंभीर असर पड़ सकता है। लंबे समय तक हाई शुगर लेवल से दिमाग और हाथ-पैर की समस्याएं भी होने का खतरा बढ़ जाता है।इंसुलिन इंजेक्शन डायबिटीज मैनेजमेंट का अहम हिस्सा है। एंडोक्रिनोलॉजिस्ट डॉ. आमिर शेख के अनुसार, जब शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता और दवाओं से शुगर कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है, तब इंसुलिन इंजेक्शन दिया जाता है।
किन मरीजों को जरूरत पड़ती है?
टाइप-1 डायबिटीज में पैंक्रियास की बीटा कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं, जिससे शरीर इंसुलिन नहीं बना पाता। ऐसे मरीजों को जीवनभर इंसुलिन की जरूरत होती है। टाइप-2 डायबिटीज में दवाओं और लाइफस्टाइल बदलाव से शुगर कंट्रोल में आ सकता है, लेकिन जब ब्लड शुगर लगातार ज्यादा रहे या पैंक्रियास कमजोर हो जाए, तब भी इंसुलिन की आवश्यकता पड़ सकती है।इंसुलिन हार्मोन खून में ग्लूकोज को कोशिकाओं तक पहुंचाकर उसे ऊर्जा में बदलने में मदद करता है। जब शरीर इसे पर्याप्त मात्रा में नहीं बना पाता या सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाता, तब खून में शुगर बढ़ जाता है। इंसुलिन इंजेक्शन ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद करता है।
इंजेक्शन कैसे काम करता है?
इंसुलिन को त्वचा के नीचे (सबक्यूटेनियस) इंजेक्ट किया जाता है। यह धीरे-धीरे ब्लडस्ट्रीम में जाकर ग्लूकोज को कोशिकाओं तक पहुंचाता है और लिवर को अतिरिक्त शुगर बनाने से रोकता है। इंजेक्शन की डोज और बारंबारता मरीज की शुगर प्रोफाइल पर निर्भर करती है।
सावधानियां
इंसुलिन इंजेक्शन एक ही जगह पर बार-बार नहीं लगाना चाहिए, क्योंकि इससे त्वचा में गांठ बन सकती है। सुई को दोबारा इस्तेमाल न करें और इसे किसी और के साथ साझा न करें। चोट लगी, मुलायम या गांठ वाली जगहों पर इंजेक्शन न लगाएं। वायल या इंजेक्शन पेन को कमरे के तापमान पर रखें और सीधी धूप या अत्यधिक गर्मी से बचाएं।
इंसुलिन इंजेक्शन सही समय और डोज में लिया जाए तो डायबिटीज को नियंत्रित रखना आसान हो जाता है और शरीर के अंगों को होने वाले नुकसान से भी बचाया जा सकता है।






