Waqf Act:
नई दिल्ली, एजेंसियां। वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में आज (16 अप्रैल 2025) से सुनवाई शुरू हो गई है। कुल 73 याचिकाएं दायर की गई हैं, जिनमें से 10 पर आज सुनवाई हो रही है। यह मामला सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच—जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस केवी विश्वनाथन—के सामने है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नया कानून मुस्लिम समुदाय के धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक अधिकारों का उल्लंघन करता है और वक्फ संपत्तियों पर सरकारी नियंत्रण को बढ़ावा देता है। उनका तर्क है कि इससे वक्फ बोर्ड की स्वायत्तता प्रभावित होगी, पारंपरिक वक्फ संपत्तियां अवैध घोषित की जा सकती हैं और अनुसूचित जनजातियों (ST) के अधिकारों का भी हनन होगा।
Waqf Act: विरोध में कांग्रेस, टीएमसी सहित अन्य पार्टियां भी शामिल
इस कानून के विरोध में कांग्रेस, टीएमसी, सीपीआई, वाईएसआर कांग्रेस, टीवीके, आरजेडी, जेडीयू, AIMIM और आप जैसी राजनीतिक पार्टियों के साथ-साथ धार्मिक संगठन जैसे जमीयत उलमा-ए-हिंद, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और IUML ने भी याचिकाएं दायर की हैं। कुछ हिंदू याचिकाकर्ताओं ने भी कानून की कुछ धाराओं पर आपत्ति जताई है, यह कहते हुए कि इससे गैरकानूनी तरीके से सरकारी जमीन और हिंदू धार्मिक स्थलों पर वक्फ का दावा किया जा सकता है।
Waqf Act:इससे भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी
दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने इस कानून को जरूरी और संविधान के अनुरूप बताया है। उसका कहना है कि यह संशोधन वक्फ संपत्तियों में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने के लिए लाया गया है और इससे भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक केविएट भी दाखिल किया है ताकि किसी भी आदेश से पहले सरकार का पक्ष अवश्य सुना जाए। आने वाले दिनों में यह मामला भारत के धर्मनिरपेक्ष ढांचे और अल्पसंख्यक अधिकारों को लेकर एक अहम कानूनी मिसाल बन सकता है।
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