आज का हिन्दू पंचांग

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दिनांक – 14 मई 2024
दिन – मंगलवार
विक्रम संवत् – 2081
अयन – उत्तरायण
ऋतु – ग्रीष्म
मास – वैशाख
पक्ष – शुक्ल
तिथि – सप्तमी रात्रि प्रातः 04:19 मई 15 तक तत्पश्चात अष्टमी
नक्षत्र – पुष्य दोपहर 01:05 तक तत्पश्चात अश्लेषा
योग- गण्ड सुबह 07:26 तक तत्पश्चात वृद्धि
राहु काल – दोपहर 03:50 से शाम 05:28 तक
सूर्योदय – 06:04*
सूर्यास्त – 07:06
दिशा शूल – उत्तर दिशा में
ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 04:37 से 05:21 तक
अभिजीत मुहूर्त -दोपहर 12:09 से दोपहर 01:01 तक
निशिता मुहूर्त- रात्रि 12:13 मई 15 से रात्रि 12:57 मई 15 तक

व्रत पर्व विवरण-

गंगा सप्तमी, विष्णुपदी संक्रांति
विशेष – सप्तमी को ताड़ का फल खाने से रोग बढता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)

श्री गंगा सप्तमी (गंगा जयंती) : 14 मई

जिस दिन गंगाजी की उत्पत्ति हुई वह दिन ‘गंगा जयंती’ (वैशाख शुक्ल सप्तमी ) और जिस दिन गंगाजी पृथ्वी पर अवतरित हुईं वह दिन ‘गंगा दशहरा’ (ज्येष्ठ शुक्ल दशमी ) के नाम से जाना जाता है ।

इन दिनों में गंगाजी में गोता मारने से विशेष सात्त्विकता, प्रसन्नता और पुण्यलाभ होता है ।

गंगा स्नान का मंत्र

गंगा स्नान के लिए रोज हरद्वार तो जा नही सकते, घर में ही गंगा स्नान का पुण्य मिलाने के लिए एक छोटा सा मन्त्र है:-

ॐ ह्रीं गंगायै । ॐ ह्रीं स्वाहा ।।

ये मन्त्र बोलते हुए स्नान करे तो गंगा स्नान का लाभ होगा।

गंगाजी का मूल मंत्र

वेद व्यासजी कहते थे कि गंगाजी का एक गोपनीय मंत्र है । और वो गंगाजी का मूल मंत्र एक बार भी जप करो तो तुम निष्पाप होने लगोगे ।

गंगाजी का मंत्र – ॐ नमो गंगायै विश्वरुपिणी नारायणी नमो नम:।

जीभ तालू में लगाओ और मन में खाली एक बार बोलो । एक बार जपने से आप का मन पवित्र हो जायेगा । गंगा मैया !! आप विश्वरूपिणी हो, नर नारायण स्वरूपी हो, गंगामाई तुमको नमस्कार !!

विष्णुपदी संक्रान्ति 14 मई 2024

भगवान वशिष्ठ जी कहते है कि विष्णुपदी संक्रांति के इस पुण्यकाल में किया हुआ जप 100000 गुना फलदायी होता है।

100 गुना , 1000 गुना , 10000 गुना तो सुना है , लेकिन विष्णुपदी संक्रांति के दिन का जप लाख गुना माना गया है । जो जहाँ है , संकल्प करके अपने अपने मंत्र में लग जायेंगे ।

विष्णुपदी संक्रांति … ये ग्रहों का जो योग है , उसका बड़ा भारी प्रभाव है ।

अपने अपने इलाकों में, अपने अपने आश्रमों में मौन होकर तिन घुट आचमन लेकर जप, ध्यान में बैठ जाओ ।

भगवान भास्कर ऋषभ राशी में प्रवेश करेंगे । ये बहुत क्रीम टाइम है । इससे तो बुद्धि में बहुत परिवर्तन होना चाहिए ।

‘मेटत कठिन कुअंक भाल के’ । इष्ट मजबूत होता है, तो अनिष्ट दूर हो जाता है।

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