संजय कृष्ण
कोडरमा जिले से छह किमी दूर झुमरी के साथ तिलैया का जुड़ाव दशकों पुराना है।
बराकर नदी में आने वाली विनाशकारी बाढ़ को रोकने के लिए बनाया गया तलैया बांध झुमरी से चिपक गया और हो गया झुमरी तिलैया।
लेकिन इस कस्बे की पहचान इतना ही नहीं है। यह दुनिया में रेडियो श्रोताओं के लिए भी जाना जाता रहा है।
विविध भारती पर प्रसारित होने वाले फरमाइशी कार्यक्रम में सर्वाधिक पत्र यहीं से पहुंचते थे। और, इस तरह यह नाम सबकी जेहन भी समा गया।
हालांकि आजादी के बहुत पहले इसकी पहचान कुछ और हुआ करती थी। 1890 के दशक में कोडरमा से होकर जब ट्रेन चली, उसी समय इस क्षेत्र में माइका की खोज हुई।
इसके बाद जल्द ही यहां कई माइका कंपनियां स्थापित हुईं। छटू राम भदानी की सीएच प्रा लि और होरील राम भदानी माइका किंग के रूप में प्रसिद्ध थे।
इन्होंने ही दुनिया में बड़े स्तर निर्यात के क्षेत्र में अपनी बादशाहत कायम की। झुमरी तिलैया केंद्र बना और 1960 के दशक तक अबाध रूप से रहा।
इस दौरान, रांची में भले ही दुर्लभ हों, लेकिन यहां की सड़कों पर मर्सिडीज और पोर्च जैसी महंगी कारें दौड़ती थीं।
एक बार ऐसा भी हुआ कि पूरे देश में सबसे ज्यादा फोन कनेक्शन यहीं पर थे और सर्वाधिक कॉलें यहीं पर आती थीं।
यहां पैदा होने वाला माइका अधिकतम सोवियत संघ को निर्यात किया जाता था। इसका मुख्य प्रयोग सेना के उपकरणों को बनाने में किया जाता था।
सोवियत संघ के विघटन के बाद वहां माइका का विकल्प खोज लिया गया। इसके बाद झुमरी तिलैया में माइका की संभावनाएं धीरे-धीरे गिरने लगीं।
जो बड़े महल, बिल्डिंग आज भी मौजूद हैं। 2007 तक वहां के माइका किंग वहां सक्रिय रहे।
इसके अतिरिक्त उन्होंने बिहार #माइका सिंडिकेट का गठन किया, जिसका कार्य सपही में था।
सपही #झुमरीतिलैया से 40 किमी दूर है। बाद में यही #सिंडिकेट बिहार स्टेट मिनरल्स कारपोरेशन के नाम से जाना गया।
जो वर्तमान में #झारखंड मिनरल्स कारपोरेशन है। धीरे-धीरे माइका की मांग में कमी आने के कारण 90 के दशक में इसका महत्व कम होता गया।
बदलते समय के अनुसार राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी ने भी इसके विकास को बाधित किया।
लेखक : वरिष्ठ पत्रकार हैं।
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