‘कॉइन बॉक्स’ फ़ोन का भी एक ज़माना था!

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सुशोभित

कोई बीसेक साल पहले- 2000 के दशक के पूर्वार्द्ध में- ये ख़ासे चलन में आए थे। टेलीफ़ोन और मोबाइल फ़ोन के बीच की कड़ी।

फ़ोन पर सबसे ज़्यादा कौन बातें करता है? लवर्स और कौन? लेकिन घर पर कैसे बातें करें? टेलीफ़ोन तो पापा की मेज़ पर ही रखा है।

एसटीडी-पीसीओ शॉप पर इतने लोगों के बीच कैसे बोलें? दफ़्तर में तो चान्स ही नहीं! उसका एक्सटेंशन बॉस के केबिन में है, जब चाहें उठाकर सुन लें- प्राइवेट बातें!

इस समस्या का इलाज था- कॉइन बॉक्स। एक मिनट का केवल एक रुपया।

लिहाजा ये ख़ूब चले। फिर एक दौर ऐसा भी आया कि मोबाइल फ़ोन तो चलन में आ गए लेकिन अभी उनके टैरिफ़ इतने ज़्यादा थे कि लड़कियाँ उन्हें ‘अफ़ोर्ड’ नहीं कर पाती थीं।

लिहाजा ‘कमाऊ-खाऊ’ लड़कों के पास मोबाइल होते और लड़कियाँ उन्हें कॉइन बॉक्स से फ़ोन लगातीं : स्कूल से छूटने के बाद, कॉलेज से छूटने के बाद, कोचिंग क्लासेस से पहले।

बाज़ वक़्तों पर सड़कों के किनारे, पान की गुमटियों, चाय के ठीयों, परचून की दुकानों पर लगे लाल-पीले कॉइन बॉक्स पर लड़कियाँ फ़ोन पर टंगी बतियाती नज़र आतीं, और एक तरतीब-सी जमा होती। कि यहाँ से वहाँ तक सभी फ़ोन ‘इंगेज’ रहते।

लड़कियाँ मुस्कराकर बातें करतीं, 55 सेकंड पूरे होने पर एक रुपए का सिक्का डब्बे में डालने के लिए निकाल लेतीं, जो तब तक उनकी हथेलियों में रखा होता : पसीने में लिथड़ा हुआ, दूसरे सिक्कों के साथ।

बातें करना सस्ता था, लेकिन कलदार का बंदोबस्त कठिन। बाज़ दफ़े लड़के ख़ुद ही लड़कियों को एकमुश्त चेंजेस मुहैया करा देते।

दीगर मौक़ों पर लड़कियाँ रेजगारी सम्हालकर रखतीं। तब लड़कियों के पर्स में सिक्के खनखनाते रहते थे, जैसे और पुराने वक़्तों में बटुए में चाबी के छल्ले खनखनाते थे।

प्रेमी लोग बहुधा बेसिरपैर की बातें करते हैं, कॉइन बॉक्स पर होने वाली बातें भी अमूमन ऐसी ही होतीं। लेकिन एक आदत बन जाया करती थी।

किन्हीं तयशुदा नंबरों से, किन्हीं ख़ास वक़्तों पर, किन्हीं कॉल्स का इंतज़ार रहता था। कॉइन बॉक्स वाले ‘अंकल्स’ लड़कियों को पहचानने लग जाते।

लड़के उन बॉक्स के फ़ोन नंबरों को पहचानने लग जाते। हद्द तो तब हो जाती, जब फ़ोन आने में तनिक देरी हो जाने पर कॉइन बॉक्स पर ‘मिस्ड कॉल’ दिए जाने लग जाते और बाज़ दफ़े ऐसा भी होता कि वही शख़्स फ़ोन उठाता, जिसके लिए कॉल दिया जा रहा था, ये कहते हुए कि “सॉरी बाबा, लेट हो गई, अभी ग़ुस्सा नहीं!”

कॉइन बॉक्स फ़ोन पर होने वाली लवर्स-टॉक्स का एक नमूना देखें :

लड़की : जो बोलना है जल्दी बोलो, 50 सेकंड हो गए हैं।

लड़का : तो क्या, एक रुपए की तो बात है। डाल दो एक और सिक्का।

लड़की : बात पैसे की नहीं, छुट्टे की प्रॉब्लम है। 55 सेकंड हो गए। फ़ोन टूं-टूं करने लगा है।

लड़का : अरे मैं ला दूंगा कलदार।

लड़की : लो मैं रख रही हूँ, ब-बाय।

लड़का : अरे सुनो तो…

लड़की : हाँ बोलो, डाल दिया सिक्का। एक रुपए का नुक़सान करवा दिया।

लड़का : कुछ नहीं, मेरी जान… बस तुम यों ही ख़ामोश बनी रहो, अगले 59 सेकंडों तक।

मैं तुम्हारी साँसों के संगीत को सुनते रहना चाहता हूँ, एक और मिनट के बाद भी, एक और सिक्के के ख़र्च हो जाने पर…

लड़की : यू आर मैड! मैं फ़ोन रख रही हूं। बाय। अब कल बातें करेंगे। (आई लव यू!)…

लेखक : देश के जाने-माने पत्रकार हैं।

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