नयी दिल्ली : साउथ एशियन यूनिवर्सिटी (एसएयू) के अध्यक्ष के के अग्रवाल ने कहा कि विश्वविद्यालय को दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (दक्षेस) के सदस्य देशों से निधि मिलनी शुरू हो गयी है और इस कदम से विश्वविद्यालय को वित्तीय संकट से उबरने में मदद मिलेगी।
अग्रवाल ने एक साक्षात्कार में कहा कि उनके कार्यकाल में विश्वविद्यालय बिना छात्रवृत्ति के अधिक छात्रों को आकर्षित करके और शिक्षकों के लिए तर्कसंगत वेतन संरचना तैयार करके खर्च को नियंत्रित करने पर ध्यान केंद्रित करेगा।
उन्होंने कहा, ‘‘ऐसा माना जाता है कि विश्वविद्यालय को सभी सदस्य देश वित्त पोषण देते हैं। अन्य लोग काफी समय से अपना हिस्सा नहीं दे रहे थे।
मैंने उन सभी से बात की है और उनका कहना यह है कि अब चीजें बेहतर होने लगी हैं तो वह अपना योगदान देने के लिए तैयार हैं।’’
एसएयू में करीब चार वर्ष से कोई नियमित अध्यक्ष नहीं था और पिछले साल दिसंबर में ही यहां अग्रवाल की नियुक्ति हुई।
अग्रवाल ने कहा कि नियमित प्रबंधन न होने और भारत के अलावा सात दक्षेस देशों द्वारा वित्त पोषण के अभाव में विश्वविद्यालय अत्यधिक वित्तीय बाधाओं का सामना कर रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘अगर कोई संस्थान इतने लंबे समय तक बिना नेतृत्व के चलता है तो जाहिर है कि उसे परेशानी का सामना करना पड़ेगा।’’
उन्होंने कहा कि अब सभी प्रतिनिधि देशों की सरकारें उचित तरीके से विश्वविद्यालय चलाने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘हम फेलोशिप और छात्रवृत्ति हर किसी को मिलने के बजाय उसे सीमित करने पर काम करेंगे। तो ऐसी कुछ चीजों से हमें यथार्थवादी बजट बनाने में मदद मिलेगी।
हम अधिक तर्कसंगत वेतन संरचना भी बनाएंगे ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सदस्यों पर बोझ न पड़े।’’
भारत के अलावा सात दक्षेस देश – अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, मालदीव, नेपाल, पाकिसतान और श्रीलंका इस अंतरराष्ट्रीय संस्थान के कुल कोष का 43 प्रतिशत योगदान देते हैं।
भारत इस संस्थान को 57 फीसदी का वित्त पोषण देता है।
विश्वविद्यालय की योजना इस निधि का इस्तेमाल दक्षिण दिल्ली के मैदान गढ़ी इलाके में स्थित उसके मौजूदा कैम्पस में बुनियादी ढांचा विकसित करने पर है।
साथ ही उसका ध्यान पूरे भारत तथा अन्य दक्षेस देशों में शाखाएं खोलने पर भी है।
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