असम में अप्रवासियों को नागरिकता देने वाला कानून वैध, CJI बोले- यह राजनीतिक समाधान था, जो कानून बना [The law giving citizenship to immigrants in Assam is valid, CJI said – it was a political solution, which became a law]

IDTV Indradhanush
2 Min Read


जस्टिस सूर्यकांत बोले- जियो और जीने दो

नई दिल्ली, एजेंसियां। सुप्रीम कोर्ट ने सिटिजनशिप एक्ट की धारा 6A की वैधता को बरकरार रखा है। CJI डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली 5 जजों की कॉन्स्टिट्यूशन बेंच ने इस पर गुरुवार को फैसला सुनाया।

बेंच में चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ के अलावा जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस एमएम सुंदरेश, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा शामिल थे। फैसले पर चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ सहित चार जजों ने सहमति जताई है। वहीं जस्टिस जेबी पारदीवाला ने असहमति जताई।

इन्हें मिल सकती है नागरिकताः

दरअसल, सिटिजनशिप एक्ट की धारा 6A को 1985 में असम समझौते के दौरान जोड़ा गया था। इस कानून के तहत जो बांग्लादेशी अप्रवासी 1 जनवरी 1966 से 25 मार्च 1971 तक असम आए हैं वो भारतीय नागरिक के तौर पर खुद को रजिस्टर करा सकते हैं।

हालांकि 25 मार्च 1971 के बाद असम आने वाले विदेशी भारतीय नागरिकता के लायक नहीं हैं।

किसी को अपना पड़ोसी चुनने की अनुमति नहीः

इस कानून पर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा- हमने धारा 6A की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा है। हम किसी को अपने पड़ोसी चुनने की अनुमति नहीं दे सकते और यह उनके भाईचारे के सिद्धांत के खिलाफ है। हमारा सिद्धांत है जियो और जीने दो।

इसे भी पढ़ें

सुप्रीम कोर्ट में ‘लेडी ऑफ जस्टिस’ की नई मूर्ति

Share This Article
कोई टिप्पणी नहीं