तेलंगाना के टनल में फंसे झारखंड के मजदूरों का अब तक पता नहीं. परिजन चिंतित [The laborers from Jharkhand trapped in the tunnel of Telangana are still unknown. family worried]

IDTV Indradhanush
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हैदराबाद, एजेंसियां। तेलंगाना के नगरकुरनूल जिले में शनिवार सुबह श्रीशैलम (श्रीशैलम लेफ्ट बैंक कैनाल-एसएलबीसी) में निर्माणाधीन टनल की छत ढहने से आठ लोग फंस गए।

इनमें चार मजदूर झारखंड के गुमला जिले के रहने वाले हैं। इसकी जानकारी मिलने के बाद मजदूरों के घरों में कोहराम मच गया।

हादसे के 36 घंटे बाद भी रविवार की रात तक टनल में फंसे मजदूरों से राहत व बचाव दल का संपर्क नहीं हो पाया था। स्वजन अनहोनी की आशंका से चिंतित हैं। रो-रोकर बुरा हाल है।

हेमंत सोरेन तेलंगाना के सीएम से बात कीः

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेमंत रेड्डी से फोन पर बात कर घटना की जानकारी ली और मजदूरों को बचाने के लिए हर संभव प्रयास करने को कहा। टनल में फंसे श्रमिकों की कुशलता की जानकारी राज्य प्रवासी नियंत्रण कक्ष ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर ली।

नियंत्रण कक्ष ने तेलंगाना सरकार से संपर्क कर स्थिति की पूरी जानकारी ली। बताया गया कि फिलहाल एनडीआरएफ की टीम बचाव अभियान में जुटी है। टनल में झारखंड के गुमला के अलावा उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और पंजाब के श्रमिक फंसे हुए हैं।

टनल में फंसे मजदूरों की पहचानः

टनल में फंसे मजदूरों में गुमला जिले के सदर थाना क्षेत्र के तिर्रा गांव निवासी संतोष साहू, घाघरा थाना क्षेत्र के खंभिया कुंबाटोली गांव निवासी रामप्रताप साहू का बेटा अनुज साहू, रायडीह थाना क्षेत्र के कोबीटोली गांव निवासी माघे खेस का बेटा जगता खेस और पालकोट थाना क्षेत्र के उमड़ा नकटी टोली गांव के जीतू साहू का बेटा संदीप साहू शामिल हैं।

सबसे पहले हादसे की खबर टनल से बचकर निकल भागने में सफल रहे दो मजदूरों ने स्वजन को फोन कर दी। गुमला के नकटी टोला गांव से कुल 40 मजदूर श्रीशैलम प्रोजेक्ट में काम करने गए हैं।

संदीप के घर में बंद है खाना-पीनाः

पालकोट प्रखंड के उमड़ा पंचायत के नकटी टोली गांव संदीप साहू का परिवार चिंतित है।
संदीप के पिता जीतू साहू ने बताया कि जब से हादसे की सूचना उनके परिवार को मिली है तब से उनके घर में खाना-पीना बंद है।

माता बिरसमनी देवी बेटा को जल्द सुरक्षित लाने का गुहार लगा रही है। बताया कि उसका बेटा अगस्त माह में आया था। होमगार्ड में उसका चयन नहीं हुआ तो वह काम के लिए बाहर चला गया।

श्रमिकों से संपर्क साधने में लगा बचाव दलः

राज्य प्रवासी नियंत्रण कक्ष ने नागरकुरनूल के श्रम पदाधिकारियों से संपर्क किया तो वहां के पदाधिकारियों ने बताया कि एनडीआरएफ की टीम टनल में प्रवेश कर चुकी है, लेकिन अभी तक श्रमिकों से कोई संपर्क स्थापित नहीं हो सका है। टनल के अंदर की स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है।

इधर, मुख्यमंत्री के निर्देश पर ही गुमला के विभिन्न बधिमा (पालकोट), कुम्बा टोली (घाघरा), खटंगा-कोबी टोली (रायडीह), और करुंदी (गुमला प्रखंड) निवासी श्रमिकों की पारिवारिक जानकारी श्रम अधीक्षक और जिला प्रशासन, गुमला द्वारा सत्यापित की गई।

सत्यापन के दौरान परिजनों ने बताया कि सभी श्रमिक तीन-चार वर्षों से तेलंगाना में कार्यरत हैं। वे अपनी स्वेच्छा से वहां गए थे। वे वर्ष में एक बार अपने गांव आते-जाते रहते थे। हादसे की खबर से परिजन अत्यंत चिंतित हैं

तथा अपने प्रियजनों की सुरक्षित वापसी की कामना कर रहे हैं। जिला प्रशासन ने परिजनों से धैर्य बनाए रखने की अपील की है। उपायुक्त गुमला द्वारा लगातार स्थिति की जानकारी ली जा रही है।

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