The Kerala Story 2 review:
मुंबई, एजेंसियां। काफी विवादों, सेंसर बोर्ड की खींचतान और कानूनी बहसों के बाद आखिरकार The Kerala Story 2 सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। निर्देशक Kamakshya Narayan Singh और निर्माता Vipul Amrutlal Shah की यह फिल्म पहले पार्ट की तरह ही संवेदनशील और विवादित विषय को आगे बढ़ाने की कोशिश करती है। हालांकि इस बार कहानी से ज्यादा चर्चा फिल्म के बाहरी घटनाक्रम को लेकर रही।
फिल्म की कहानी क्या है?
फिल्म की कहानी तीन लड़कियों दिव्या, नेहा और सुरेखा के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अलग-अलग शहरों से हैं और अपने-अपने सपनों के साथ जिंदगी जी रही होती हैं। दिव्या (अदिति भाटिया) एक युवा डांसर है, नेहा (ऐश्वर्या ओझा) एक एथलीट, जबकि सुरेखा (उल्का गुप्ता) यूपीएससी की तैयारी कर रही छात्रा है। तीनों को अलग-अलग परिस्थितियों में ऐसे युवकों से प्रेम होता है, जो बाद में अपने असली मकसद उजागर करते हैं। फिल्म में कथित ‘गजवा-ए-हिंद’ मिशन के तहत हिंदू लड़कियों को फंसाने और उनका धर्म परिवर्तन कराने की साजिश को केंद्रीय थीम बनाया गया है।
फिल्म एक ही दिशा में आगे बढ़ती है
कहानी का ट्रीटमेंट डॉक्यूमेंट्री-स्टाइल है, जिसमें तीखे संवाद, तेज एडिटिंग और भावनात्मक दृश्यों के जरिए दर्शकों को झकझोरने की कोशिश की गई है। हालांकि समस्या यह है कि फिल्म एक ही दिशा में आगे बढ़ती दिखाई देती है। कई सीन प्रभावशाली हैं, लेकिन कथानक में विविधता और संतुलन की कमी महसूस होती है। किरदारों को पर्याप्त गहराई नहीं मिलती, जिससे उनके फैसले कई बार अवास्तविक लगते हैं।
अभिनय फिल्म की मजबूत कड़ी है। उल्का गुप्ता, अदिति भाटिया और ऐश्वर्या ओझा ने अपने किरदारों के डर, असमंजस और भावनात्मक टूटन को सच्चाई से पेश किया है। सहायक कलाकारों ने भी कहानी को विश्वसनीय बनाने में योगदान दिया है, खासकर क्लाइमैक्स में माता-पिता के भावनात्मक दृश्य प्रभाव छोड़ते हैं।
फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी क्या है?
फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसका एकतरफा नैरेटिव है। भले ही निर्माता का दावा हो कि किसी समुदाय को निशाना नहीं बनाया गया, लेकिन स्क्रीन पर कहानी स्पष्ट रूप से एक खास दिशा में झुकी हुई लगती है। संवेदनशील विषय होने के बावजूद अलग-अलग दृष्टिकोणों को जगह न मिल पाने से फिल्म कई जगह प्रचारात्मक प्रतीत होती है।
कुल मिलाकर, ‘द केरल स्टोरी 2’ भावनात्मक रूप से असर डालने की कोशिश करती है, लेकिन एक संतुलित और परतदार कहानी की उम्मीद रखने वाले दर्शकों को यह अधूरी लग सकती है। यह फिल्म हर किसी के लिए नहीं है; इसे देखना या न देखना दर्शकों की व्यक्तिगत पसंद और विषय में रुचि पर निर्भर करता है।








