नई दिल्ली,एजेंसियां। अमेरिका और यूरोपीय देशों के बीच बढ़ते तनाव के बीच फ्रांस ने अमेरिका से ऐतिहासिक ‘स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी’ को वापस करने की मांग की है।
फ्रांस की वामपंथी पार्टी के सह अध्यक्ष राफेल ग्लुक्समान का कहना है कि अमेरिका अब इस धरोहर के लायक नहीं रहा। यह मांग ऐसे समय में आई है जब अमेरिका ने यूक्रेन को सैन्य सहायता देने से इनकार कर दिया, जिससे यूरोपीय देशों में नाराजगी बढ़ी है।
क्यों दिया था फ्रांस ने अमेरिका को स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी?
स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी अमेरिका का एक ऐतिहासिक स्मारक और स्वतंत्रता का प्रतीक है। 1886 में अमेरिका की स्वतंत्रता की 100वीं वर्षगांठ पर फ्रांस ने यह प्रतिमा गिफ्ट में दी थी। इसे फ्रांसीसी मूर्तिकार फ्रेडरिक ऑगस्टे बार्थोल्डी ने डिजाइन किया था। यह प्रतिमा लोकतंत्र, स्वतंत्रता और न्याय का प्रतीक मानी जाती है।
कैसे अमेरिका पहुंचा था इतना बड़ा स्टैच्यू?
स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी की ऊंचाई 93 मीटर (305 फीट) है और यह तांबे से बना हुआ है। इसके सिर पर सात किरणों वाला मुकुट है, जो सात महाद्वीपों और समुद्रों का प्रतीक है। स्टैच्यू के पैरों में टूटी जंजीरें हैं, जो गुलामी से आज़ादी का संकेत देती हैं।
यह प्रतिमा 350 टुकड़ों में विभाजित करके 214 बॉक्सों में भरकर जहाज से अमेरिका भेजी गई थी। इसे 26 अक्टूबर 1886 को न्यूयॉर्क हार्बर में स्थापित किया गया था।
अब देखना होगा कि अमेरिका इस मांग पर क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या फ्रांस की यह मांग कोई बड़ा विवाद खड़ा करेगी।
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