नीचे जा रहे भूगर्भ जल स्तर को लेकर नहीं चेते, तो होगा बेंगलुरु जैसा हाल
रांची। बेंगलुरु शहर में उत्पन्न जल संकट ने भारत समेत पूरी दुनिया को चौंका दिया है। सिलिकान वैली के नाम से मशहूर यह शहर पानी की कमी से जूझ रहा है।
1000 फीट तक बोरवेल के बाद भी पीने योग्य पानी नहीं मिल रहा। रांची की स्थिति भी इससे बहुत अलग नहीं है।
मल्टी सटोरी बिल्डिंग की बढ़ती संख्या, बढ़ते शहरीकरण, औद्योगिकीकरण और आबादी की वजह से पिछले 10 वर्षों में जबर्दस्त तरीके से भू-गर्भ जल का दोहन हुआ है।
सेन्ट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, शहर के विभिन्न क्षेत्रों में दो वर्षों में ग्राउंड वाटर लेवल सात मीटर तक नीचे चला गया है।
शहर के रातू रोड, पिस्कामोड़, पंडरा, कटहलमोड़, पुंदाग, कांके रोड, बोड़ेया, तुपुदाना सहित एक दर्जन से अधिक क्षेत्र ऐसे हैं, जहां 500 फीट गहरा बोरवेल के बावजूद पानी नहीं मिल रहा है।
बोरवेल करने वाली एजेंसियों की माने तो पिछले वर्ष शहर में 12 हजार से अधिक नए बोरवेल किए गए थे।
इसमें करीब दस हजार बोरवेल ऐसे घरों में किया गया, जहां पहले वाला बोरवेल फेल हो गया था।
रांची शहरी क्षेत्र की आबादी के लिए 63 साल वर्ष पहले गेतलसूद, गोंदा और हटिया डैम बनाए गए।
1961 की जनगणना के अनुसार शहरी क्षेत्र की कुल आबादी मात्र 1.40 लाख थी। आज आबादी बढ़कर करीब 18 लाख हो गई है।
बढ़ती आबादी को देखते हुए सरकार ने डैमों को व्यवस्थित करने की कोई योजना नहीं बनाई।
नतीजा यह कि डैमों में सीवरेज-ड्रेनेज की गंदगी जा रही है। इसे केमिकल से फिल्टर कर पाइपलाइन से घरों में पहुंचाया जा रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक रिचार्ज जोन बनाकर पॉलिसी बनाने की जरूरत है। वाटर हार्वेस्टिंग बनाकर सीमेंट से ढंके नहीं, उसे खुला रखने की जरूरत है।
नदियों में चेक डैम बनाना होगा, ताकि पानी रुके और तालाबों को कंक्रीट से घेरने के बजाय खुला रखे। यदि नहीं चेते तो काफी दिक्कत होगी।
झारखंड में पिछले कुछ वर्षों में सामान्य से कम बारिश हो रही है। इसके बावजूद जल संरक्षण के प्रति लोग गंभीर नहीं है।
हाल यह है कि शहर में मात्र 20% घरों में ही रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम है। निगम के आंकड़े बताते हैं कि शहर में कुल 2.30 लाख घर बने हैं, पर 17 प्रतितशत घरों में ही रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बना हुआ है।
यह स्थिति गंभीर है और बताती है कि यदि हम नहीं चेते तो आने वाले दिनों में बेंगलुरू वाली हालत से हमें भी दो-चार होना पड़ सकता है।
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