भारतीय सिनेमा के अनमोल रत्न थे संजीव कुमार

3 Min Read

मुम्बई, एजेंसियां : अभिनेता संजीव कुमार (1938-1985) भारतीय सिनेमा के एक अनमोल रत्न थे, जिन्होंने अपनी अद्वितीय अभिनय कला से दर्शकों के मनों को छू लिया।

उनका असली नाम हरिहर जेठालाल जरीवाला था, लेकिन संजीव कुमार के नाम से वह सिनेमा के आसमान में चमकते रहे।

गुजराती परिवार से उत्पन्न, संजीव बचपन से ही मंच के प्रति प्रेमी थे। 1960 में फिल्म ‘हम हिंदुस्तानी’ में उन्होंने अपना पहला कदम सिनेमा की दुनिया में रखा।

शुरुआती दिनों में, वे छोटे पायदानों से शुरूआत करने को मिला। लेकिन 1968 में फिल्म ‘संघर्ष’ ने उनके करियर को नई ऊँचाइयों तक ले जाया। उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता के फिल्मफेयर पुरस्कार से नवाजा गया।

उस समय से, निर्माता-निर्देशकों ने उनकी प्रतिभा को माना, और उन्हें मुख्य भूमिकाओं के लिए चुना। ‘आखिरी दौर’ (1970), ‘दुश्मन’ (1971), ‘अनुभव’ (1971) जैसी फिल्मों में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं, जिन्हें उनके अभिनय की सराहना मिली।

संजीव कुमार को सच्चे अर्थ में बहुमुखी अभिनेता कहा जा सकता है। उन्होंने रोमांटिक हीरो, कॉमेडियन, और चरित्र अभिनेता के रूप में उत्तम प्रदर्शन किया।

‘आखिरी दौर’ में उन्होंने एक टूटे हुए कलाकार का किरदार निभाया, ‘शोले’ (1975) में “ठाकुर” की भूमिका उनके अभिनय का एक अद्वितीय उदाहरण है।

वहीं ‘शतरंज के खिलाड़ी’ (1977) में उन्होंने नवाब मीर रॉशन अली का किरदार अद्वितीयता से निभाया।

संजीव कुमार का व्यक्तिगत जीवन उतना ही असफल रहा, जितना उनका फिल्मी सफर। उनकी शादी 1974 में हुई, लेकिन कुछ ही सालों बाद टूट गई। यह अकेलेपन और असफलता का दर्द उनके जीवन पर असर डाला।

फिल्मों में उनका समर्पण अद्वितीय था। वे हमेशा अपने किरदारों में उतरने के लिए पूरी मेहनत करते थे। उनका दानशीलता और सेवाभाव उन्हें हमेशा याद रखा जाता है। 1976 में उन्हें ‘पद्म भूषण’ से सम्मानित किया गया।

संजीव कुमार का निधन 1985 में हो गया, लेकिन उनकी चमक आज भी धूमिल नहीं हुई है। उनका अद्वितीय अभिनय और विविधतापूर्ण भूमिकाएं उन्हें हिंदी सिनेमा के महान अभिनेताओं में से एक बना दिया।

2018 में उनकी जीवनी फिल्म ‘संजीव कुमार: द अनटोल्ड स्टोरी’ ने उनके याद में एक बार फिर से उनकी महत्वपूर्ण यात्रा को जीवंत किया।

संजीव कुमार ने भारतीय सिनेमा के एक अद्वितीय सितारे के रूप में हमेशा चमकते रहेंगे, और उनकी विरासत आने वाले पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।

इसे भी पढ़ें

आरएसएस अपने प्रशिक्षण कार्यक्रमों की सामग्री एवं शब्दावली में बदलाव कर रहा: वैद्य

Share This Article
कोई टिप्पणी नहीं