Permission of parliament:
नई दिल्ली, एजेंसियां। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह (महासचिव) दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि संविधान की प्रस्तावना में ‘सोशलिस्ट’ (समाजवादी) और ‘सेक्युलर’ (धर्मनिरपेक्ष) शब्दों को लेकर देश में खुली बहस होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ये दोनों शब्द मूल संविधान में नहीं थे और इमरजेंसी के दौरान संसद की सहमति के बिना जोड़ दिए गए थे।
होसबाले दिल्ली में आयोजित ‘आपातकाल के 50 साल’ कार्यक्रम में बोल रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा-मूल संविधान में सोशलिस्ट और सेक्युलर शब्द नहीं थे। इमरजेंसी के समय देश में संसद और न्यायपालिका दोनों काम नहीं कर रही थी। इस दौरान इन दो शब्दों को जोड़ दिया गया। ये शब्द रहें या नहीं, इस पर बहस होनी चाहिए।
Permission of parliament:इमरजेंसी को लेकर साधा निशानाः
होसबाले ने कांग्रेस और राहुल गांधी का नाम लिए बिना भी इमरजेंसी को लेकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इमरजेंसी के समय संविधान की हत्या की गई थी और न्यायपालिका की स्वतंत्रता खत्म कर दी गई थी।
Permission of parliament:इमरजेंसी के दौरान जोड़े गये थे दोनों शब्दः
दरअसल ‘सेक्युलर’ और ‘सोशलिस्ट’ शब्द 1976 में 42वें संशोधन के जरिए शामिल किए गए थे। इस दौरान देश में आपातकाल था। 25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल की घोषणा की थी। यह 21 मार्च 1977 यानी 21 महीने तक लागू रहा था। भाजपा इस दिन को संविधान हत्या दिवस के रूप में मनाती है।
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