Rajiv Gandhi controversy:
चंडीगढ़, एजेंसियां। पंजाब के पटियाला स्थित Rajiv Gandhi National University of Law (RGNUL) के नाम से ‘राजीव गांधी’ हटाने की सिफारिश के बाद राज्य की सियासत गरमा गई है। विश्वविद्यालय की अकादमिक काउंसिल ने प्रस्ताव पारित कर सुझाव दिया है कि संस्थान का नाम बदलकर केवल ‘नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी’ रखा जा सकता है। अंतिम निर्णय राज्य सरकार और संबंधित प्राधिकारियों को लेना है।
कुलदीप सिंह गड़गज्ज द्वारा उठाई गई मांग
यह प्रस्ताव नवंबर 2024 में ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज द्वारा उठाई गई मांग के बाद सामने आया। उन्होंने केंद्र सरकार से विश्वविद्यालय का नाम बदलने की अपील की थी। उनका तर्क था कि 1984 के सिख विरोधी दंगों की पृष्ठभूमि में ‘राजीव गांधी’ नाम सिख समुदाय की भावनाओं को आहत करता है। काउंसिल ने इसी संदर्भ को ध्यान में रखते हुए नाम परिवर्तन पर विचार किया।RGNUL की स्थापना 2006-07 में पंजाब सरकार ने एक अधिनियम के तहत की थी। यह राज्य का प्रमुख विधि विश्वविद्यालय है और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी शैक्षणिक पहचान रखता है। नाम बदलने के प्रस्ताव ने शैक्षणिक जगत के साथ-साथ राजनीतिक हलकों में भी बहस छेड़ दी है।
पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह ने कहा
पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह ने कहा कि उन्हें प्रस्ताव की पूरी जानकारी नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विस्तृत विवरण मिलने और अध्ययन करने के बाद ही वे इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी करेंगे। गौरतलब है कि वे पटियाला ग्रामीण क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं, जहां यह विश्वविद्यालय स्थित है।वहीं, पटियाला से सांसद धर्मवीर गांधी ने इस कदम की आलोचना की है। उन्होंने इसे आगामी चुनावों से पहले मतदाताओं को ध्रुवीकृत करने की कोशिश बताया। उनका कहना है कि देश में शिक्षा और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्थापित संस्थानों के नाम बदलना ऐतिहासिक विरासत को कमजोर करने जैसा है।
नाम परिवर्तन को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं। एक पक्ष इसे समुदाय की भावनाओं के सम्मान से जोड़ रहा है, जबकि दूसरा इसे इतिहास और संस्थागत पहचान के साथ छेड़छाड़ बता रहा है।
अब सबकी नजर राज्य सरकार के अंतिम निर्णय पर है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो विश्वविद्यालय का नाम बदलने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू होगी, जिसमें विधायी और प्रशासनिक कदम शामिल होंगे। फिलहाल यह मुद्दा शिक्षा और राजनीति दोनों मोर्चों पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है।








