फरवरी में रिटेल महंगाई 4% से नीचे आ सकती है, सांख्यिकी मंत्रालय जारी करेगा आंकड़े [Retail inflation may come below 4% in February, Statistics Ministry will release data]

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जनवरी में महंगाई 4.31% पर थी

नई दिल्ली, एजेंसियां। फरवरी में रिटेल महंगाई दर जनवरी के मुकाबले कम रह सकती है। सभी श्रेणी की वस्तुओं, खास तौर पर खाने की चीजों के दाम घटने से यह 4% से नीचे आ सकती है, जो रिजर्व बैंक के टारगेट के भीतर है। आज शाम 4 बजे सांख्यिकी मंत्रालय महंगाई के आंकड़े जारी करेगा।

खाने पीने की चीजों के सस्ती होने का असरः

खाने-पीने की चीजें सस्ती होने से जनवरी में रिटेल महंगाई 5 महीने के निचले स्तर 4.31% पर आ गई थी। अगस्त में महंगाई 3.65% पर थी। इससे पहले दिसंबर में महंगाई 5.22% रही थी। महंगाई के बास्केट में लगभग 50% योगदान खाने-पीने की चीजों का होता है।

जून तक कम ही रहेंगी सब्जियों की कीमतेः

बैंक ऑफ बड़ौदा के चीफ इकोनॉमिस्ट मदन सबनवीस के अनुसार, फरवरी में रिटेल महंगाई घटकर 4.1% पर आ सकती है। हर क्षेत्र में कीमतें घट रही हैं। सब्जियों के थोक दाम में गिरावट आई है। सबसे ज्यादा टमाटर और आलू के भाव घटे हैं। यह स्थिति जून तक बने रहने की संभावना है।

4 मार्च से 10 मार्च के बीच 45 अर्थशास्त्रियों के बीच किए गए रॉयटर्स के सर्वे में अनुमान लगाया गया कि फरवरी में रिटेल महंगाई घटकर 3.98% पर आ सकती है।

महंगाई कैसे प्रभावित करती है?

महंगाई का सीधा संबंध पर्चेजिंग पावर से है। उदाहरण के लिए यदि महंगाई दर 6% है, तो अर्जित किए गए 100 रुपए का मूल्य सिर्फ 94 रुपए होगा। इसलिए महंगाई को देखते हुए ही निवेश करना चाहिए। नहीं तो आपके पैसे की वैल्यू कम हो जाएगी।

महंगाई कैसे बढ़ती-घटती है?

महंगाई का बढ़ना और घटना प्रोडक्ट की डिमांड और सप्लाई पर निर्भर करता है। अगर लोगों के पास पैसे ज्यादा होंगे तो वे ज्यादा चीजें खरीदेंगे। ज्यादा चीजें खरीदने से चीजों की डिमांड बढ़ेगी और डिमांड के मुताबिक सप्लाई नहीं होने पर इन चीजों की कीमत बढ़ेगी।

इस तरह बाजार महंगाई की चपेट में आ जाता है। सीधे शब्दों में कहें तो बाजार में पैसों का अत्यधिक बहाव या चीजों की शॉर्टेज महंगाई का कारण बनता है। वहीं अगर डिमांड कम होगी और सप्लाई ज्यादा तो महंगाई कम होगी।

CPI से तय होती है महंगाईः

एक ग्राहक के तौर पर आप और हम रिटेल मार्केट से सामान खरीदते हैं। इससे जुड़ी कीमतों में हुए बदलाव को दिखाने का काम कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स यानी CPI करता है। हम सामान और सर्विसेज के लिए जो औसत मूल्य चुकाते हैं, CPI उसी को मापता है।

कच्चे तेल, कमोडिटी की कीमतों, मेन्युफैक्चर्ड कॉस्ट के अलावा कई अन्य चीजें भी होती हैं, जिनकी रिटेल महंगाई दर तय करने में अहम भूमिका होती है। करीब 300 सामान ऐसे हैं, जिनकी कीमतों के आधार पर रिटेल महंगाई का रेट तय होता है।

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