पटना, एजेंसियां। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के स्वास्थ्य को लेकर विपक्ष सवाल उठा रहा है। आरजेडी के विधायक भाई वीरेंद्र ने दावा किया कि उन्हें खाने में कुछ मिलाकर दिया जा रहा है, जिसकी जांच होनी चाहिए। इसी बीच पटना में आरजेडी की ओर से एक पोस्टर लगाया गया है, जिसमें नीतीश कुमार को “खलनायक” बताया गया है और उन पर महिलाओं व गांधीजी का अपमान करने का आरोप लगाया गया है।
राजनीतिक विशेषज्ञ का क्या है कहना
राजनीतिक विशेषज्ञ अरुण कुमार पांडेय का मानना है कि नीतीश कुमार की हालिया गतिविधियों से विपक्ष को बड़ा मुद्दा मिल गया है। उनका स्वास्थ्य आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में एक अहम मुद्दा बन सकता है। बीजेपी इस पर अभी चुप है, लेकिन 29-30 मार्च को अमित शाह और फिर अप्रैल में पीएम मोदी बिहार आने वाले हैं, जिससे बीजेपी अपनी चुनावी रणनीति स्पष्ट करेगी।
हालांकि, नीतीश कुमार का अब भी मजबूत जनाधार है, खासकर पिछड़े वर्गों में। बिहार में जातिगत राजनीति को देखते हुए बीजेपी उनसे दूरी बनाने के बजाय रणनीतिक रूप से उनके प्रभाव का उपयोग कर सकती है। एनडीए में चिराग पासवान और जीतन राम मांझी जैसे सहयोगी होने से बीजेपी मजबूत स्थिति में है।
कैसा हैं है वर्तमान का हाल
वर्तमान में जेडीयू कमजोर हो चुकी है। लोकसभा चुनाव में बीजेपी और जेडीयू ने बराबर सीटें जीती थीं, लेकिन जेडीयू को केंद्रीय मंत्रिमंडल में प्रमुख मंत्रालय नहीं मिला। बिहार मंत्रिमंडल के हालिया विस्तार में भी जेडीयू को जगह नहीं मिली। पटना यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव में भी जेडीयू पिछड़ गई, जिससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि आगामी विधानसभा चुनाव में इसका फायदा बीजेपी को हो सकता है।
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