पटना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी आधी सरकार के साथ आज बिहार आयेंगे। यहां वह औरंगाबाद और बेगूसराय में राज्यवासियों को 1.72 हजार करोड़ की सौगात देंगे।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर के साथ कई केद्रीय मंत्री भी मौजूद रहेंगे।
प्रधानमंत्री के आगमन को लेकर भाजपा में उत्साह का माहौल है। प्रधानमंत्री सबसे पहले औरंगाबाद पहुंचेंगे, जहां वे 21 हजार 400 करोड़ रुपए से अधिक की कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन, लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे।
प्रधानमंत्री गंगा नदी पर छह लेन वाले पुल की आधारशिला भी रखेंगे, जिसे पटना रिंग रोड के एक हिस्से के रूप में विकसित किया जाएगा। ये पुल देश के सबसे लंबे नदी पुलों में से एक होगा।
बिहार में नमामि गंगे के तहत लगभग 2 हजार 190 करोड़ रुपए की लागत से विकसित की गई बारह परियोजनाओं का भी उद्घाटन पीएम मोदी करेंगे।
प्रधानमंत्री पटना में यूनिटी मॉल का भी शिलान्यास करेंगे। 200 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से निर्मित होने वाली इस परियोजना की परिकल्पना एक अत्याधुनिक सुविधा के रूप में की गई है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय डिजाइन व्यवहारों, प्रौद्योगिकी, सुविधा और सौंदर्यीकरण शामिल हैं।
ये मॉल राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और जिलों को एक समर्पित स्थान प्रदान करेगा, जिससे वे अपने विशिष्ट उत्पादों और शिल्प कौशल का प्रदर्शन कर सकेंगे।
राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों के लिए 36 बड़े स्टॉल और बिहार के प्रत्येक जिले के लिए 38 छोटे स्टॉल होंगे।
पीएम मोदी बिहार में तीन रेलवे परियोजनाएं भी राष्ट्र को समर्पित करेंगे। प्रधानमंत्री बेगूसराय में भी कई योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे।
प्रधानमंत्री लगभग 1 लाख 48 हजार करोड़ रुपए की कई तेल और गैस परियोजनाओं का उद्घाटन, लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे।
बिहार में लगभग 14 हजार करोड़ रुपए की तेल और गैस क्षेत्र की परियोजनाएं शुरू की जाएंगी।
प्रधानमंत्री जिन परियोजनाओं की शुरुआत करेंगे, उनमें तेल, गैस, उर्वरक और रेलवे से समेत कई क्षेत्रों से संबंधित हैं।
कुल 39 परियोजनाओं का या तो उद्घाटन किया जाएगा या फिर शिलान्यास होगा। उद्घाटन और शिलान्यास में कुल 10 प्रोजेक्ट रेलवे से जुड़े हुए हैं।
इस दौरान छह नई ट्रेनों को भी हरी झंडी दिखाई जाएगी। प्रधानमंत्री बरौनी में हिंदुस्तान उर्वरक और रसायन लिमिटेड (एचयूआरएल) उर्वरक संयंत्र का उद्घाटन करेंगे।
9 हजार 500 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से विकसित ये संयंत्र किसानों को किफायती दर पर यूरिया उपलब्ध कराएगा।
उनकी उत्पादकता और वित्तीय स्थिरता में वृद्धि करेगा। ये देश में फिर से चालू होने वाला चौथा उर्वरक संयंत्र होगा।
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