3 आपराधिक कानूनों के खिलाफ याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज

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नई दिल्ली, एजेंसियां। सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय न्याय संहिता 2023 समेत तीन नए क्रिमिनल कानूनों की जांच और लागू होने के बाद सही ढंग से काम करने की जांच के लिए एक विशेषज्ञ समिति बनाने का निर्देश देने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी।

याचिका में कहा गया था कि ये बिल संसद में बिना बहस के पास कर दिए गए। उस वक्त ज्यादातर विपक्षी सांसद सस्पेंड थे।

जस्टिस बेला एम त्रिवेदी और जस्टिस पंकज मिथल की वैकेशन बेंच ने कहा कि ये कानून अब तक लागू नहीं हुए हैं।

अपील करने में भी लापरवाही हुई है। अगर इस पर ज्यादा बहस की जाती तो याचिका को जुर्माने के साथ खारिज किया जाता।

बेंच के आदेश के बाद याचिका लगाने वाले एडवोकेट विशाल तिवारी ने कोर्ट से याचिका वापस लेने की परमिशन मांगी।

इसके पहले सरकार ने बताया था कि भारतीय दंड संहिता (IPC) में सुधारों के बाद ये तीनों कानून बने हैं।

लोकसभा ने 21 दिसंबर 2023 को तीन बिलों भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य संहिता बिल पास किए थे। 25 दिसंबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इन बिलों पर दस्तखत किए थे।

तीन नए आपराधिक कानून 1 जुलाई 2024 से लागू हो जाएंगे। सरकार ने 24 फरवरी 2024 को इससे जुड़ी अधिसूचना जारी की थी।

यानी इंडियन पीनल कोड (IPC) की जगह भारतीय न्याय संहिता, क्रिमिनल प्रोसीजर कोड (CrPC) की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और एविडेंस एक्ट की जगह भारतीय साक्ष्य अधिनियम लागू हो जाएगा।

नए कानून के लागू होने के बाद जो धाराएं अपराध की पहचान बन चुकी थीं, उनमें भी बदलाव होगा।

जैसे हत्या के लिए लगाई जाने वाली IPC की धारा 302 अब धारा 101 कहलाएगी। ठगी के लिए लगाई जाने वाली धारा 420 अब धारा 316 होगी।

हत्या के प्रयास के लिए लगाई जाने वाली धारा 307 अब धारा 109 कहलाएगी। वहीं, दुष्कर्म के लिए लगाई जाने वाली धारा 376 अब धारा 63 होगी।

हालांकि, हिट एंड रन केस का संबंधित प्रावधान तुरंत लागू नहीं होगा। केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने जनवरी में कहा था कि भारतीय न्याय संहिता की धारा 106 (2) को लागू करने का फैसला अखिल भारतीय मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (AIMTC) से सलाह के बाद ही लिया जाएगा।

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