नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करने की प्रक्रिया को सरल बनाने के उद्देश्य से नए नियम पेश किए हैं।
इन नियमों के तहत, आवेदकों के पास अब निजी तौर पर संचालित ड्राइविंग प्रशिक्षण केंद्रों में अपने ड्राइविंग टेस्ट देने का विकल्प है, जो कि केवल सरकारी संचालित क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (RTO) पर निर्भर रहने की पारंपरिक प्रथा से अलग है।
इन प्रशिक्षण केंद्रों को ड्राइविंग टेस्ट लेने और ड्राइविंग सर्टिफिकेट जारी करने की परमिशन दी जाएगी। इस बदलाव की वजह से ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना आसान हो जाएगा।
भावी चालक आधिकारिक वेबसाइट https://parivahan.gov.in/ के माध्यम से ऑनलाइन या व्यक्तिगत रूप से RTO जाकर ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन करना चुन सकते हैं।
आवेदन शुल्क लाइसेंस के प्रकार पर निर्भर करता है। हालाँकि, चुने गए आवेदन पद्धति के बावजूद, आवेदकों को अभी भी आवश्यक दस्तावेज़ जमा करने और अनुमोदन के लिए अपने ड्राइविंग कौशल का प्रदर्शन करने के लिए RTO जाना होगा।
नए नियमों में नाबालिगों के वाहन चलाते पाए जाने पर जुर्माना भी बढ़ा दिया गया है। ऐसी घटनाओं में 25000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा, जबकि वाहन मालिक का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया जाएगा।
इसके अलावा नाबालिग 25 वर्ष की आयु तक लाइसेंस के लिए पात्र नहीं होगा। सरकार ने कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए 9 लाख पुराने सरकारी वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाने की योजना बनाई है। इसके अलावा, वह सख्त उत्सर्जन मानदंड भी लागू करेगी।
सरकार ने ट्रेनिंग सेंटर्स के लिए भी नए नियम बनाए हैं। लाइट मोटर व्हीकल पर प्रशिक्षण के लिए ट्रेनिंग सेंटर के पास कम से कम 1 एकड़ जमीन होनी चाहिए, जबकि हैवी मोटर व्हीकल के प्रशिक्षण के लिए 2 एकड़ जमीन की जरूरत होगी।
इन केंद्रों को अपनी टेस्टिंग फैसिलिटी तक पहुंच भी प्रदान करनी होगी।
नए नियमों के तहत लर्नर लाइसेंस जारी करने के लिए 150 रुपये का शुल्क लगेगा, जबकि लर्नर लाइसेंस टेस्ट के लिए आवेदकों को 50 रुपये का भुगतान करना होगा।
ड्राइविंग टेस्ट के लिए 300 रुपये का शुल्क लिया जाएगा और ड्राइवर लाइसेंस जारी करने के लिए 200 रुपये का शुल्क लगाया जाएगा।
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