Mukesh Ambani : मुकेश अंबानी का एंटीलिया भी वक्फ की प्रॉपर्टी, अब क्या होगा आगे… [Mukesh Ambani’s Antilia is also a Waqf property, what will happen next…]

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नई दिल्ली, एजेंसियां। लोकसभा ने बुधवार को वक्फ (संशोधन) विधेयक पर चर्चा की और लंबी बहस के बाद मध्यरात्रि के बाद इसे पारित कर दिया। इस बीच, शुक्रवार को इस बिल को राज्यसभा में भी पारित कर दिया गया। अब यह विधेयक दोनों सदनों में पारित हो चुका है और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हस्ताक्षर के बाद यह कानून बन जाएगा।

Mukesh Ambani : एंटीलिया बना वक्फ विधेयक के बीच चर्चा का विषय

विधेयक का उद्देश्य पिछले अधिनियम की कमियों को दूर करना और वक्फ बोर्ड की कार्यक्षमता को बढ़ाना है, जिसमें पंजीकरण प्रक्रिया को बेहतर बनाना और वक्फ रिकॉर्ड्स के प्रबंधन में प्रौद्योगिकी की भूमिका को बढ़ाना शामिल है। इस बीच, भारत के सबसे अमीर उद्योगपति मुकेश अंबानी का आवास, 15,000 करोड़ रुपये की लागत वाली एंटीलिया, एक बार फिर वक्फ संशोधन विधेयक के बीच चर्चा का विषय बन गया है।

Mukesh Ambani: एंटीलिया किस भूमि पर बना है

सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और एआइएमआइएम प्रमुख और हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी जैसे नेताओं के पुराने वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें वे यह आरोप लगाते हुए दिख रहे हैं कि मुकेश अंबानी का निजी आवास एंटीलिया वक्फ बोर्ड की संपत्ति पर बना है। नेटिज़न्स सोशल मीडिया पर एआई टूल ‘ग्रोक’ से यह सवाल पूछ रहे हैं कि मुकेश अंबानी का एंटीलिया किस भूमि पर बना है। इसके जवाब में, ग्रोक ने कहा कि यह भूमि पहले एक अनाथालय की थी और 2002 में इसे बेचा गया था।

Mukesh Ambani :मुकेश अंबानी को जमीन बेचने की प्रक्रिया सही नहीं

मीडिया की एक पुरानी रिपोर्ट ने वक्फ बोर्ड द्वारा प्रस्तुत एक एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) का हवाला दिया, जिसमें यह आरोप लगाया गया था कि मुकेश अंबानी को भूमि बेचने की प्रक्रिया सही तरीके से नहीं अपनाई गई थी। उस समय महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आश्वासन दिया था कि उनकी सरकार उस रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई करेगी।

रिपोर्ट के अनुसार, मुकेश अंबानी के आवास के लिए खरीदी गई भूमि को वक्फ बोर्ड के सदस्य द्वारा दो-तिहाई बहुमत से मंजूरी मिलनी चाहिए थी, लेकिन इस संबंध में कोई आधिकारिक बोर्ड बैठक नहीं हुई। चैरिटी कमिश्नर द्वारा किया गया निर्णय भी चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि रिपोर्ट के अनुसार, ऐसा निर्णय वक्फ बोर्ड ही ले सकता था, न कि चैरिटी कमिश्नर।

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