ll वैदिक पंचांग ll [Vedic Panchang]

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दिनांक – 01 सितम्बर 2024
दिन – रविवार
विक्रम संवत – 2081
शक संवत -1946
अयन – दक्षिणायन
ऋतु – शरद ॠतु
मास – भाद्रपद
पक्ष – कृष्ण
तिथि – चतुर्दशी 02 सितम्बर प्रातः 05:21 तक तत्पश्चात अमावस्या
नक्षत्र – अश्लेशा रात्रि 08:49 तक तत्पश्चात मघा
योग – परिघ शाम 05:50 तक तत्पश्चात शिव
राहुकाल – शाम 05:20 से शाम 06:55 तक
सूर्योदय -05:33
सूर्यास्त- 06:05
दिशाशूल – पश्चिम दिशा में

व्रत पर्व विवरण –

मासिक शिवरात्रि,अघोरा चतुर्दशी

विशेष – चतुर्दशी, रविवार, अमावस्या एवं व्रत के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)

रविवार के दिन मसूर की दाल, अदरक और लाल रंग का साग नहीं खाना चाहिए।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण खंडः 75.90)

रविवार के दिन काँसे के पात्र में भोजन नहीं करना चाहिए।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण खंडः 75)
स्कंद पुराण के अनुसार रविवार के दिन बिल्ववृक्ष का पूजन करना चाहिए। इससे ब्रह्महत्या आदि महापाप भी नष्ट हो जाते हैं।

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ग़रीबी – दरिद्रता मिटाने के लिए

02 सितम्बर 2024 सोमवार को सूर्योदय से 03 सितम्बर, सूर्योदय तक सोमवती अमावस्या है।
सोमवती अमावस्या के दिन 108 बार अगर तुलसी की परिक्रमा करते हो, ॐकार का थोड़ा जप करते हो, सूर्य नारायण को अर्घ्य देते हो; यह सब साथ में करो तो अच्छा है, नहीं तो खाली तुलसी को 108 बार प्रदक्षिणा करने से तुम्हारे घर से दरिद्रता भाग जाएगी |

नकारात्मक ऊर्जा मिटाने के लिए

02 सितम्बर 2024 सोमवार को भाद्रपद अमावस्या, दर्श अमावस्या, पीठोरी -कुशोत्पाटिनी अमावस्या, सोमवती अमावस्या है।

घर में हर अमावस अथवा हर १५ दिन में पानी में खड़ा नमक (1 लीटर पानी में 50 ग्राम खड़ा नमक) डालकर पोछा लगायें ।

इससे नेगेटिव एनेर्जी चली जाएगी । अथवा खड़ा नमक के स्थान पर गौझरण अर्क भी डाल सकते हैं।

अमावस्या

अमावस्या के दिन जो वृक्ष, लता आदि को काटता है अथवा उनका एक पत्ता भी तोड़ता है, उसे ब्रह्महत्या का पाप लगता है (विष्णु पुराण)

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