ll वैदिक पंचांग ll

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दिनांक – 11 मार्च 2024
दिन – सोमवार
विक्रम संवत – 2080
शक संवत -1945
अयन – उत्तरायण
ऋतु – वसंत ॠतु
मास – फाल्गुन
पक्ष – शुक्ल
तिथि – प्रतिपदा सुबह 10:44 तक तत्पश्चात द्वितीया
नक्षत्र – उत्तरभाद्रपद रात्रि 11:02 तक तत्पश्चात रेवती
योग – शुभ सुबह 11:58 तक तत्पश्चात शुक्ल
राहुकाल – सुबह 08:20 से सुबह 09:50 तक
सूर्योदय-06:05
सूर्यास्त- 05:45
दिशाशूल – पूर्व दिशा में
व्रत पर्व विवरण – चंद्र -दर्शन (शाम 06:34 से रात्रि 07:42 तक),पंचक
विशेष – प्रतिपदा को कूष्माण्ड (कुम्हड़ा पेठा) न खाएं क्योकि यह धन का नाश करने वाला है (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)

पति-पत्नी के झगड़े या अनबन

पति-पत्नी में झगड़े होते हों, तलाक को नौबत आ जाए अथवा पति-पत्नी में मन नहीं बनता है तो पति अपने सिर के नीचे सिन्दूर रख के सो जाए और पत्नी अपने सिर के नीचे कपूर रख के सो जाए ।

सुबह उठे तो कपूर की आरती कर डालें और पति सिन्दूर घर में फ़ेंक दें, तो पति-पत्नी का स्वभाव अच्छा हो जायेगा ।

रोजी – रोटी की चिंता नहीं करनी पड़ेगी

जीवन को यदि तेजस्वी, सफल और उन्नत बनाना हो तो मनुष्य को त्रिकाल संध्या जरुर करनी चाहिए |

हमारी आंतरिक अवस्था ऊँची करने में संध्या के समय आध्यात्मिकता का आश्रय बड़ी मदद करता है | इस समय की हुई भगवद-आराधना विशेष लाभ करती है |

व्यक्ति का चित्त शीघ्र निर्दोष एवं पवित्र हो जाता है | ईश्वर- प्रसाद पचाने का सामर्थ्य आ जाता है |

नित्य नियम से त्रिकाल संध्या करनेवाले के जीवन में किसीके सामने हाथ फैलाने का दिन नहीं आता | रोजी-रोटी की चिंता नहीं करनी पडती |

गर्मी में पीपल का मुर्रब्बा

किसी को गर्मी खूब लगती हो तो पीपल के कोमल-कोमल पत्ते टुकड़े-टुकड़े करके उबाल कर उनका मुर्रब्बा बना लें। इससे ताकत भी बहुत आएगी।

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