ll वैदिक पंचांग ll

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दिनांक – 15 मई 2024
दिन – बुधवार
विक्रम संवत – 2081
शक संवत -1946
अयन – उत्तरायण
ऋतु – ग्रीष्म ॠतु
मास – वैशाख
पक्ष – शुक्ल
तिथि – अष्टमी पूर्ण रात्रि तक
नक्षत्र – अश्लेशा शाम 03:25 तक तत्पश्चात मघा
योग – वृद्धि सुबह 07:42 तक तत्पश्चात ध्रुव
राहुकाल – दोपहर 12:35 से दोपहर 02:14 तक
सूर्योदय-05:21
सूर्यास्त- 06:28
दिशाशूल – उत्तर दिशा में

व्रत पर्व विवरण –

बुधवारी अष्टमी (सूर्योदय से 16 मई सूर्योदय तक),अष्टमी वृद्धि तिथि

विशेष – अष्टमी को नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)

मोहिनी एकादशी पर सहस्र वर्षो की तपस्या का पुण्य केवल इतना करने से मिल जाता है

बुधवारी अष्टमी

15 जून 2024 बुधवार को सूर्योदय से 16 मई सूर्यास्त तक वैशाख शुक्ल पक्ष की बुधवारी अष्टमी हैं ।

बुधवायुक्तायां शुक्ला शुक्लाष्टम्यां, परयुता ग्राह्या

बुधवारी शुक्लपक्ष अष्टमी बहुत पुण्यशाली होती है और इस दिन किया गया स्नान, दान, धर्म, जप, तप आदि सब सूर्यग्रहण के समान फल देते हैं।

अमावस्या तु सोमेन सप्तमी भानुना सह।
चतुर्थी भूमिपुत्रेण सोमपुत्रेण चाष्टमी।
चतस्रस्तिथयस्त्वेताः सूर्यग्रहणसन्निभाः॥

शिवपुराण, गरुड़पुराण, अग्निपुराण, भविष्यपुराण, स्कंदपुराण सभी में बुधाष्टमी की महत्ता का वर्णन है।

भविष्यपुराण में श्रीकृष्ण बुधाष्टमी के व्रत की महत्ता बताते हुए कहते हैं कि इसको करने से नरक का मुख नहीं देखना पड़ता।

“बुधाष्टमीव्रतं भूयो ब्रवीमि शृणु पांडव ।
येन चीर्णेन नरकं नरः पश्यति न क्वचित् ।।”

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