दिनांक -29 अप्रैल 2024
दिन – सोमवार
विक्रम संवत – 2081
शक संवत -1946
अयन – उत्तरायण
ऋतु – ग्रीष्म ॠतु
मास – वैशाख
पक्ष – कृष्ण
तिथि – पंचमी सुबह 07:57 तक तत्पश्चात षष्ठी
नक्षत्र – पूर्वाषाढा 30 अप्रैल प्रातः 04:42 तक तत्पश्चात उत्तराषाढा
योग – सिद्ध रात्रि 12:26 तक तत्पश्चात साद्ध
राहुकाल – सुबह 07:46 से सुबह 09:23 तक
सूर्योदय-05:31
सूर्यास्त- 06:21
दिशाशूल – पूर्व दिशा में
व्रत पर्व विवरण –
पूज्य बापूजी का अवतरण दिवस अर्थात विश्व सेवा दिवस
विशेष – पंचमी को बेल खाने से कलंक लगता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)
इस योग का लाभ अवश्य प्राप्त करे
बुधवारी अष्टमी
01 मई 2024 बुधवार को सूर्योदय से 02 मई प्रात: 04:01 तक बुधवारी अष्टमी है ।
मंत्र जप एवं शुभ संकल्प हेतु विशेष तिथि
सोमवती अमावस्या, रविवारी सप्तमी, मंगलवारी चतुर्थी, बुधवारी अष्टमी – ये चार तिथियाँ सूर्यग्रहण के बराबर कही गयी हैं।
इनमें किया गया जप-ध्यान, स्नान , दान व श्राद्ध अक्षय होता है। (शिव पुराण, विद्यश्वर संहिताः अध्याय 10)
वास्तु शास्त्र
एक घर में होना चाहिए एक मंदिर
एक घर में अलग-अलग पूजाघर बनवाने की बजाए मिल-जुलकर एक मंदिर बनवाए।
एक घर में कई मंदिर होने पर वहां के सदस्यों को मानसिक, शारीरिक और आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
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