दिनांक -28 अप्रैल 2024
दिन – रविवार
विक्रम संवत – 2081
शक संवत -1946
अयन – उत्तरायण
ऋतु – ग्रीष्म ॠतु
मास – वैशाख
पक्ष – कृष्ण
तिथि – चतुर्थी सुबह 08:21 तक तत्पश्चात पंचमी
नक्षत्र – मूल 29 अप्रैल प्रातः 04:49 तक तत्पश्चात पूर्वाषाढा
योग – शिव 29 अप्रैल रात्रि 02:06 तक तत्पश्चात सिद्ध
राहुकाल – शाम 05:26 से शाम 07:03 तक
सूर्योदय-05:31
सूर्यास्त- 06:21
दिशाशूल – पश्चिम दिशा में
व्रत पर्व विवरण –
विशेष – चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)
रविवार के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)
रविवार के दिन मसूर की दाल, अदरक और लाल रंग का साग नहीं खाना चाहिए।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण खंडः 75.90)
रविवार के दिन काँसे के पात्र में भोजन नहीं करना चाहिए।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण खंडः 75)
स्कंद पुराण के अनुसार रविवार के दिन बिल्ववृक्ष का पूजन करना चाहिए।
इससे ब्रह्महत्या आदि महापाप भी नष्ट हो जाते हैं।
शनि निवारण का उपाय
गले में लाल धागे में रुद्राक्ष पहनलें और भगवान शिव जी को बिल्व पत्र चढ़ाने से शनि शांत होते हैं l
इसे भी पढ़ें
थानेदार ने बच्ची को जिंदा जलने से बचाया, दिया मानवता और साहस का परिचय








