ll वैदिक पंचांग ll

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दिनांक -27 अप्रैल 2024
दिन – शनिवार
विक्रम संवत – 2081
शक संवत -1946
अयन – उत्तरायण
ऋतु – ग्रीष्म ॠतु
मास – वैशाख
पक्ष – कृष्ण
तिथि – तृतीया सुबह 08:17 तक तत्पश्चात चतुर्थी
नक्षत्र – जेष्ठा 28 अप्रैल प्रातः 04:28 तक तत्पश्चात मूल
योग – परिघ 28 अप्रैल रात्रि 03:24 तक तत्पश्चात शिव
राहुकाल – सुबह 09:23 से सुबह 11:00 तक
सूर्योदय-05:31
सूर्यास्त- 06:20
दिशाशूल – पूर्व दिशा में

व्रत पर्व विवरण –

संकष्ट चतुर्थी (चन्द्रोदय:रात्रि 10:13)

विशेष – तृतीया को पर्वल खाना शत्रुओं की वृद्धि करने वाला है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)

ब्रह्म पुराण’ के 118 वें अध्याय में शनिदेव कहते हैं- ‘मेरे दिन अर्थात् शनिवार को जो मनुष्य नियमित रूप से पीपल के वृक्ष का स्पर्श करेंगे, उनके सब कार्य सिद्ध होंगे तथा मुझसे उनको कोई पीड़ा नहीं होगी।

जो शनिवार को प्रातःकाल उठकर पीपल के वृक्ष का स्पर्श करेंगे, उन्हें ग्रहजन्य पीड़ा नहीं होगी।’ (ब्रह्म पुराण’)

शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष का दोनों हाथों से स्पर्श करते हुए ‘ॐ नमः शिवाय।’ का 108 बार जप करने से दुःख, कठिनाई एवं ग्रहदोषों का प्रभाव शांत हो जाता है। (ब्रह्म पुराण’)

हर शनिवार को पीपल की जड़ में जल चढ़ाने और दीपक जलाने से अनेक प्रकार के कष्टों का निवारण होता है ।(पद्म पुराण)

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