ll वैदिक पंचांग ll

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दिनांक – 07 अप्रैल 2024

दिन – रविवार

विक्रम संवत – 2080

शक संवत -1945

अयन – उत्तरायण

ऋतु – वसंत ॠतु

मास – चैत्र

पक्ष – कृष्ण

तिथि – त्रयोदशी सुबह 06:53 तक तत्पश्चात चतुर्दशी

नक्षत्र – पूर्वभाद्रपद दोपहर 12:58 तक तत्पश्चात उत्तरभाद्रपद

योग – ब्रह्म रात्रि 10:17  तक तत्पश्चात इन्द्र

राहुकाल – शाम 05:22 से शाम 06:55 तक

सूर्योदय-05:42

सूर्यास्त- 06:04

दिशाशूल – पश्चिम दिशा में

व्रत पर्व विवरण – मासिक शिवरात्रि,पंचक,चतुर्दशी क्षय तिथि

विशेष –

त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)

रविवार के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)

रविवार के दिन मसूर की दाल, अदरक और लाल रंग का साग नहीं खाना चाहिए।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण खंडः 75.90)

रविवार के दिन काँसे के पात्र में भोजन नहीं करना चाहिए।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण खंडः 75)

स्कंद पुराण के अनुसार रविवार के दिन बिल्ववृक्ष का पूजन करना चाहिए। इससे ब्रह्महत्या आदि महापाप भी नष्ट हो जाते हैं।

सोमवती अमावस्याः दरिद्रता निवारण

08 अप्रैल 2024 सोमवार को सूर्योदय से रात्रि 11:50 तक सोमवती अमावस्या है।

सोमवती अमावस्या के पर्व में स्नान-दान का बड़ा महत्त्व है।

इस दिन भी मौन रहकर स्नान करने से हजार गौदान का फल होता है।

इस दिन पीपल और भगवान विष्णु का पूजन तथा उनकी 108 प्रदक्षिणा करने का विधान है।

108 में से 8 प्रदक्षिणा पीपल के वृक्ष को कच्चा सूत लपेटते हुए की जाती है।

प्रदक्षिणा करते समय 108 फल पृथक रखे जाते हैं। बाद में वे भगवान का भजन करने वाले ब्राह्मणों या ब्राह्मणियों में वितरित कर दिये जाते हैं। ऐसा करने से संतान चिरंजीवी होती है।

इस दिन तुलसी की 108 परिक्रमा करने से दरिद्रता मिटती है।

धन-धान्य व सुख-संम्पदा के लिए

हर अमावस्या को घर में एक छोटा सा आहुति प्रयोग करें।

सामग्री : काले तिल,जौं,चावल, गाय का घी, चंदन पाउडर, गूगल, गुड़, देशी कर्पूर और  गौ चंदन या कण्डा।

 विधि:

गौ चंदन या कण्डे को किसी बर्तन में डालकर हवनकुंड बना लें, फिर उपरोक्त 8 वस्तुओं के मिश्रण से तैयार सामग्री से, घर के सभी सदस्य एकत्रित होकर नीचे दिये गये देवताओं की 1-1 आहुति दें।

आहुति मंत्र

  • ॐ कुल देवताभ्यो नमः
  • ॐ ग्राम देवताभ्यो नमः
  • ॐ ग्रह देवताभ्यो नमः
  • ॐ लक्ष्मीपति देवताभ्यो नमः
  • ॐ विघ्नविनाशक देवताभ्यो नमः

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