Kunal Kamra Supreme Court notice:
नई दिल्ली, एजेंसियां। विवादों में रहने वाले स्टैंडअप कॉमेडियन Kunal Kamra को लेकर एक नया मामला सामने आया है। देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें नोटिस जारी किया है। यह नोटिस सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियमों से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान जारी किया गया। इस मामले में अदालत ने Editors Guild of India और Association of Indian Magazines को भी नोटिस भेजा है।
आईटी नियमों को लेकर चल रहा है विवाद
दरअसल, केंद्र सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें संशोधित आईटी नियमों के कुछ प्रावधानों को असंवैधानिक बताया गया था। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए।गौरतलब है कि बॉम्बे हाई कोर्ट ने हाल ही में आईटी नियमों के तहत बनाए गए फैक्ट-चेकिंग से जुड़े प्रावधानों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ माना था। कोर्ट का कहना था कि इन नियमों से लोगों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है।इसी फैसले को चुनौती देते हुए केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है और मामले में विस्तृत सुनवाई जारी रखने का फैसला किया है।
कुणाल कामरा ने भी दी थी चुनौती
स्टैंडअप कॉमेडियन कुणाल कामरा भी उन लोगों में शामिल हैं जिन्होंने केंद्र सरकार के आईटी नियमों को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उनका कहना था कि यह नियम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन करते हैं और इससे सरकार को ऑनलाइन कंटेंट पर ज्यादा नियंत्रण मिल सकता है।सुप्रीम कोर्ट ने इसी मामले में सुनवाई के दौरान कामरा को भी नोटिस जारी किया है, ताकि वह अदालत के सामने अपना पक्ष रख सकें।
पहले भी विवादों में रहे हैं कामरा
कुणाल कामरा अक्सर अपने स्टैंडअप कॉमेडी शो में राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर व्यंग करते हैं। इसी कारण वह कई बार विवादों में भी रहे हैं। पिछले साल उन्होंने महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को लेकर एक टिप्पणी की थी, जिसके बाद विवाद खड़ा हो गया था।विवाद बढ़ने के बाद कामरा कुछ समय के लिए मुंबई छोड़कर तमिलनाडु में रहने लगे थे।अब सुप्रीम कोर्ट की ओर से नोटिस जारी होने के बाद यह मामला फिर चर्चा में आ गया है। आने वाले समय में अदालत की सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट होगा कि आईटी नियमों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े इस विवाद का क्या नतीजा निकलता है।







