Jharkhand coal scam: झारखंड में 2742 करोड़ का कोयला घोटाला, 222.27 करोड़ की संपत्ति हो चुकी अटैच

4 Min Read

Jharkhand coal scam:

रांची। ईडी ने अवैध कोयला खनन और कोयला चोरी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने अनूप मांझी उर्फ लाला और उसके सिंडिकेट से जुड़े लोगों की 100.44 करोड़ रुपए की संपत्ति अस्थाई तौर पर जब्त कर ली है। इससे पहले भी सिंडिकेट की 222.27 करोड़ की संपत्ति जब्त की जा चुकी हैं। यानी कुल 322.71 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त हो चुकी है।

जांच एजेंसी के मुताबिक ईस्टर्न कोल फील्ड्स लिमिटेड के लीज होल्ड क्षेत्र में सक्रिय इस सिंडिकेट का नेतृत्व अनूप मांझी कर रहा था। इस सिंडिकेट ने अवैध खनन कर कोयला पश्चिम बंगाल की विभिन्न फैक्ट्रियों में सप्लाई की। इसमें स्थानीय प्रशासन की भी मिलीभगत थी। कोयले के इस अवैध धंधे से लाला सिंडिकेट ने 2742 करोड़ रुपए से अधिक की काली कमाई की।

पूरा खेल हवाला के जरिएः

जांच में यह भी पता चला कि इस घोटाले का पूरा खेल हवाला के जरिए संचालित हो रहा था। लेनदेन के लिए एक खास कोड का इस्तेमाल किया जाता था, जो आमतौर पर नोट का सीरियल नंबर होता था। जब कैश पहुंचाया जाता था तो रिसीवर उसी नंबर का नोट दिखाकर कैश ले लेता था। इससे कोई औपचारिक दस्तावेज या बैंक रिकॉर्ड नहीं होता था।

‘लाला पैड’ से चलता था ग्रीन सिग्नल सिस्टम, फोटो भेजते ही बिना जांच गुजरते थे ट्रकः

जांच में अवैध परिवहन के एक बेहद संगठित नेटवर्क का भी खुलासा हुआ है। ईडी की जांच में पता चला है कि तस्करी को सुचारु रूप से चलाने के लिए एक खास फर्जी चालान सिस्टम तैयार किया गया था। इसे ‘लाला पैड’ नाम दिया गया था। जांच एजेंसी के मुताबिक, इस नेटवर्क को अनूप मांझी ने ऑपरेट किया। सिस्टम इस तरह बनाया गया था कि ट्रकों को रास्ते में किसी तरह की जांच का सामना न करना पड़े।

स्टील व आयरन कंपनियों ने कोयले को नकदी में खरीदाः

ईडी की जांच में यह भी पता चला कि स्टील व आयरन सेक्टर की कुछ कंपनियों ने अवैध कोयले को नकदी में खरीदा। इस तरह जान-बूझकर अपराध से कमाई में मदद की, इसका इस्तेमाल किया और इसे बेदाग दिखाया। इस जुर्म में कई लेयर व मुश्किल वित्तीय लेन-देन शामिल हैं। इन्हें जुर्म की कमाई को छिपाने के लिए डिजाइन किया गया था। ईडी सुनियोजित तरीके से हर लेयर को खोल रही है, ताकि असली अपराधी और कमाई की पहचान की जा सके। अवैध तरीके से अर्जित फंड की लॉन्ड्रिंग में शामिल दूसरे लोगों का भी पता लगाया जा सके, ताकि पूरा मामला सामने आ सके।

ऐसे काम करता था पूरा नेटवर्कः

ट्रक ड्राइवर को 10 या 20 रुपए का एक नोट दिया जाता था।
ड्राइवर नोट को ट्रक की नंबर प्लेट के पास रखकर उसका फोटो खींचता था।
यह फोटो ऑपरेटर को भेजी जाती थी, जो उसे वॉट्सएप पर आगे तैनात अधिकारियों तक पहुंचा देता था।
फोटो मिलते ही ट्रक को बिना जांच आगे जाने दिया जाता था।

Share This Article
Exit mobile version