नई दिल्ली,एजेंसियां। रोज सनस्क्रीन लगाने से कैंसर का खतरा? जानें सच्चाई और सही इस्तेमाल के तरीके
सनस्क्रीन को लेकर कई तरह की गलत धारणाएं हैं, जिनमें से एक यह भी है कि इसका नियमित उपयोग कैंसर का कारण बन सकता है। लेकिन सच यह है कि सनस्क्रीन त्वचा को हानिकारक UV किरणों से बचाकर त्वचा कैंसर के खतरे को कम करता है।
सनस्क्रीन क्यों है जरूरी?
UV किरणों से बचाव:
सूरज की पराबैंगनी (UV) किरणें त्वचा कैंसर का मुख्य कारण होती हैं। इनमें UVA और UVB किरणें शामिल हैं, जो त्वचा की गहराई तक जाकर उसे नुकसान पहुंचा सकती हैं। सनस्क्रीन इन किरणों को अवशोषित या परावर्तित करके त्वचा को सुरक्षित रखता है।
त्वचा कैंसर का कम जोखिम:
रोजाना सनस्क्रीन लगाने से मेलेनोमा और अन्य त्वचा कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसके अलावा, यह झुर्रियों, झाइयों और समय से पहले त्वचा की उम्र बढ़ने से भी बचाता है।
सनस्क्रीन का सही इस्तेमाल कैसे करें?
ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन चुनें: UVA और UVB दोनों से बचाने वाला “ब्रॉड-स्पेक्ट्रम” सनस्क्रीन उपयोग करें।
SPF 30 या अधिक चुनें: 30 या उससे अधिक SPF वाला सनस्क्रीन अधिक प्रभावी होता है।
सही तरीके से लगाएं: चेहरे, गर्दन, कान, हाथों और सभी खुले हिस्सों पर अच्छी मात्रा में सनस्क्रीन लगाएं।
हर दो घंटे में दोबारा लगाएं: खासकर तब, जब आप तैराकी कर रहे हों या अधिक पसीना आ रहा हो।
केवल सनस्क्रीन पर निर्भर न रहें
- सनस्क्रीन के अलावा, कुछ और उपाय अपनाकर UV किरणों से अतिरिक्त सुरक्षा पाई जा सकती है
- धूप में कम समय बिताएं, खासकर दोपहर में।
- पूरी बांह के कपड़े पहनें और टोपी का इस्तेमाल करें।
- सूरज की हानिकारक किरणों से बचने के लिए UV प्रोटेक्शन वाले धूप के चश्मे पहनें।
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